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पुनौती, रजमना के बाद अब सिंहपुर में दिखा बाघ

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खुटार। पुनौती, रजमना के बाद अब गांव सिंहपुर में बाघ देखे जाने से गांव के लोग दहशत में हैं। बाघ के डर से रात भर लोग पटाखे चलाकर शोर-शराबा करते रहे।
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गांव सिंहपुर निवासी लेखराम बुधवार रात फसल की रखवाली करने गए थे। खेत से कुछ दूर बाघ देखे जाने पर वह शोर मचाते हुए भागकर गांव आए और लोगों को जानकारी दी। बाघ होने की जानकारी पाकर गांव के लोग दहशत में आ गए। लोगों ने पटाखे चलाना और शोर मचाना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद गांव के रामदयाल के घर के पीछे गन्ने के खेत में बाघ होने की आशंका से लोगों ने जमकर शोर शराब किया।
इसके बाद गांव के ही शैलेंद्र सिंह के खेत में बाघ देखे जाने की जानकारी मिली। बाघ के गांव में आ जाने की आशंका के कारण गांव के लोग रात भर जागते रहे। गांव के लोगों ने बताया कि बाघ होने की सूचना वनकर्मियों को भी दी गई, लेकिन किसी ने मौके पर पहुंचने की जरूरत नहीं समझी है। जिधर बाघ देखा गया उधर के खेतों में गांव के लोग डर के मारे काम करने नहीं गए।
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सितंबर से फरवरी तक गन्ने के खेतों में डेरा जमाते हैं बाघ
- शिकार की आसानी से उपलब्धता भी है वजह
खुटार। खुटार के आसपास के जंगल पीलीभीत टाइगर रिजर्व और जनपद लखीमपुर की खीरी रेंज से लेकर किशनपुर सेंक्चुरी और दुधवा नेशनल पार्क तक जुड़े हैं, जिस कारण जंगल के आसपास के खेतों में बाघ, तेंदुए अपना डेरा जमा लेते हैं। मादा बाघ और तेंदुए जंगल की अपेक्षा गन्ने के खेतों को प्रजनन के लिए ज्यादा सुरक्षित मानते हैं, क्योंकि अन्य शिकारी पशु गन्ने के खेतों की ओर रुख कम करते हैं। गन्ने के लंबे प्लॉटों में लोगों की आवाजाही भी न के बराबर होती है।
जंगल की अपेक्षा खेतों में कम गर्मी लगती है। यहां नीलगाय, सुअर और आवारा घूमते पशुओं के कारण शिकार भी आसानी से मिल जाता है। पानी आदि की उपलब्धता भी रहती है। यही कारण है कि सितंबर से फरवरी तक गन्ने के बड़े भूभाग वाले खेत बाघ और तेंदुओं का पसंदीदा स्थान बन जाते हैं।
एक ही बाघ के घूमने की चर्चा
खुटार। 15 दिन पूर्व खुटार रेंज के सिहुरा बीट के लौहंगापुर जंगल के पास गांव पुनौती, मंडनपुर आदि में बाघ देखे जाने पर डीएफओ आदर्श कुमार ने जंगल में कैमरे लगाए थे। इसके बाद गांव भरकलीगंज में वन्य पशु के हमले में दो लोग घायल हो गए थे। वन अधिकारी भालू के हमले में घायल होने की बात कह रहे हैं, लेकिन तमाम लोगों का मानना है कि हमला बाघ ने किया था। आठ सितंबर को गांव रजमना में बाघ देखे जाने से दहशत फैल गई थी, अब गांव सिंहपुर में बाघ देखे जाने से लोग परेशान हैं। लोगों का मानना है कि एक ही बाघ खेतों में घूम रहा है, जो जंगल के आसपास गांवों तक पहुंच जाता है।
सावधानी ही बचाव
खुटार। खुटार के वन क्षेत्राधिकारी टीम के साथ गांवों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। टीम के सदस्य किसानों से खेत पर अकेले नहीं जाने, खेत पर काम करने के दौरान आपस में बात करने, रेडियो को खेत पर बजा कर रखने, बच्चों को खेत पर नहीं ले जाने, जंगल में नहीं जाने की अपील कर रहे हैं।
किसान समूह लेकर खेत पर नहीं जा सकता है। अधिकतर अकेले ही काम करना पड़ता है। वन विभाग के अधिकारियों को किसानों की परेशानी समझनी चाहिए। किसान खेत पर काम करे कि शोर शराबा करे और शोर शराबा भी कहां तक करेगा? यह कोई नहीं सोचता है।
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जहां बाघ देखा जाए, वहां वन विभाग की टीम को तत्काल पहुंचकर पगचिह्न आदि की जांच कर लोगों को सही जानकारी देनी चाहिए। वनकर्मियों की लापरवाही किसी पर भारी पड़ सकती है। किसान भाई भी अफवाहों पर ध्यान देने से बचें।
सिंहपुर में बाघ देखे जाने की जानकारी नहीं मिली है। वनकर्मियों को मौके पर भेजा जाएगा और जांच कराई जाएगी।
- डीएस यादव, रेंजर खुटार
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