जलालाबाद। प्रदेश सरकार ने करीब तीन साल पहले नगर को भगवान परशुराम की जन्मस्थली घोषित कर दिया। इसके बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
मुख्यमंत्री संवर्धन योजना के तहत 19 करोड़ की धनराशि सरकार ने इसके सुंदरीकरण के लिए मंजूर की थी, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी धरातल पर कोई काम नजर नहीं आ रहा है।
अप्रैल, 2022 में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के मंत्री जयवीर सिंह ने जलालाबाद स्थित भगवान परशुराम जन्मस्थली को पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की थी। इस प्रसिद्ध स्थल से ही हर साल 15 दिवसीय रामलीला मेले का संचालन होता है। अक्षय तृतीया पर यहां भगवान परशुराम के जन्मोत्सव से जुड़े विभिन्न तरह के धार्मिक आयोजन एक सप्ताह तक लगातार चलते हैं। सहालग सीजन के दौरान विभिन्न मुहूर्त पर मंदिर प्रांगण में कई तरह के सामाजिक तथा धार्मिक संस्कार के कार्यक्रम संपन्न करवाने के लिए दूरदराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं को धूप व बारिश आदि से बचाव, बैठने के लिए छायादार जगह, पीने के पानी और शौचालय के अलावा वाहनों के आवागमन को सुगम रास्ता व पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है।
व्यवस्था न होने से भीड़भाड़ व बेतरतीब ढंग से वाहनों के खड़े रहने से मंदिर के आसपास की गलियों में कई-कई घंटों का जाम लग जाता है। इन्हीं जरूरतों को पूरा करने तथा स्थल के सुंदरीकरण के लिए करीब एक साल पहले सरकार ने स्वीकृत 19 करोड़ की धनराशि में से पांच करोड़ की पहली किस्त भी जारी कर दी गई।
इस धनराशि से बारहपत्थर रोड से मंदिर तक पहुंचने के लिए चौड़ा रास्ता तथा इसी के पास पार्किंग की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए थे। लंबा समय बीतने के बाद भी अभी तक इस दिशा में कोई कार्य धरातल पर उतरता नजर नहीं आ रहा है।
जलालाबाद में ध्वस्त पड़ी परशुराम मंदिर परिसर की धर्मशाला व उसके आगे का चबूतरा। संवाद