दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित कर घर से निकाल दिए जाने के मामले में जिला पारिवारिक न्यायालय ने बीते आठ दिसंबर 2012 को जलालाबाद के हरकटेटा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में नियुक्त सहायक अध्यापक नुसरत अली पांच हजार रुपये पत्नी को बतौर गुजारा भत्ता देने का निर्देश जारी हुआ था लेकिन अध्यापक की पत्नी शहनाज उर्फ चंदा बीते 19 अप्रैल को फिर से इसी अदालत में अर्जी देकर बताया कि उसे गुजारा भत्ता नहीं दिया जा रहा है। उसी मामले में बुधवार को सुनवाई पूरी करते हुए पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश भगवती प्रसाद सक्सेना ने बीएसए को अर्द्धशासकीय पत्र निर्गत कर निर्देश दिया कि उक्त अध्यापक के वेतन से 20 हजार रुपये की रिकवरी करते हुए वादिनी के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम कोर्ट में बृहस्पतिवार को जमा करें। कोर्ट में दी गई अर्जी में वादिनी शहनाज उर्फ चंदा ने बताया कि 17 दिसंबर 2007 को इस वादे के साथ नुसरत ने उससे निकाह कबूल किया कि छह माह में दहेज में मारुति कार देंगे। बाकी दान - दहेज में दिए गे गए जेवर, उपहार आदि अलग से थे। ससुराल जाने के बाद चंदा पर कार के लिए दबाव बनाया जाने लगा तो मायके वालों में जैसे -तैसे 50 हजार रुपये मोटरसाइकिल के लिए दिए। बाद में चंदा को बच्चा हुआ लेकिन वह बीमार हुआ तो उसकी ठीक से देखभाल न किए जाने से उसकी मौत हो गई और वह खुद भी बीमार हुई तो ससुराल वालों ने उसे मायके कांट पहुंचा दिया। काफी समय तक ससुराल से कोई विदा कराने नहीं आया तो चंदा के पिता के पंचायत बुलाई जिसमें मारुति कार की मांग पूरी करने के सर्थ पर ससुराल वाले विदा करा ले गए। बाद में पांच सितंबर 2010 को ससुराल वालों से चंदा को बुरी तरह मारापीटा और मिट्टी का तेल डालकर जलाने की कोशिश की। उसके शोर मचाने पर पड़ोसियों ने किसी तरह उसे बचाया और शाम छह बजे ससुराल वाले उसे उसके मायके छोड़ गए। सदमे में इस वाकये के एक माह के भीतर चंदा के पिता का इंतकाल हो गया। तब उसकी शिकायत पर पुलिस ने समझौता कराया और उसे ससुराल भेजवाया। वहां जाने के हफ्ते भर बाद ससुराल वाले फिर से कार के लिए परेशान करने लगे तो उसने अपने भाई को सूचना दी। वह भी नुसरत के पास पहुंचा तो ससुराल वालों ने अपने बेटे की सरकारी नौकरी लग जाने के चलते उसका निकाह कहीं और करने की बात करने लगे और चंदा को उसके भाई के साथ घर से निकाल दिया। फिर चंदा ने पारिवारिक अदालत में गुजारे भत्ते के लिए गुहार की तो बीते दिसंबर माह में कोर्ट ने उक्त आदेश दिया था।