कुछ गांवों के लोग खेत में पूरी तरह से पक चुकी गेहूं की फसल को सर्वे कराने के चक्कर में नहीं काट रहे हैं। किसानों का मानना है कि गेहूं कटने के बाद सर्वे नहीं हो पाएगा, जिस कारण उनको सहायता राशि मिलने में समस्या होगी।
गौरतलब है कि बारिश और ओलावृष्टि के कारण तहसील पुवायां क्षेत्र में गेहूं की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार की टीम और प्रदेश सरकार के सचिव अनिल कुमार पुवायां क्षेत्र में फसलों की बर्बादी का सर्वे कर चुके हैं, लेकिन लेखपाल अभी तक कई गांवों में सर्वे करने नहीं पहुंचे हैं। कई गांवों के किसान लेखपालों पर फर्जी सर्वे किए जाने का आरोप भी लगा चुके हैं। जिन गांवों में किसानों को सहायता राशि के चेक दिए गए हैं, वहां भी तमाम किसान मदद पाने से वंचित रह गए हैं।
गांव बेला, कटका, अगौना सहित कई गांवों के कुछ किसान गेहूं की फसल को नहीं काट रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि फसल कट गई तो सर्वे कैसे होगा और सहायता राशि किस तरह से मिल सकेगी। एसडीएम लालबहादुर का कहना है कि किसान गेहूं की फसल को काट लें, जिन किसानों की फसल खराब हुई है, उनको सहायता राशि का चेक जरूर मिलेगा।