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टोकन का तामझाम....गेहूं बेचने के लिए भटक रहा किसान

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पुवायां। किसानों ने गेहूं बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के बाद सेंटरों के टोकन तो कटवा लिए हैं, लेकिन आढ़तों पर सही रेट मिलने के कारण सेंटरों पर गेहूं नहीं पहुंच पा रहा है। इस कारण सेंटरों पर भीड़ नहीं हो रही है।
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सेंटरों पर भीड़ न हो, इस कारण रजिस्ट्रेशन के बाद किसान को सेंटर से टोकन लेना पड़ता है। टोकन मिलने पर नियत तिथि पर किसान को सेंटर पर गेहूं लाना होता है। आढ़तियों के गेहूं घर से उठाने के कारण मंडी की आढ़तों पर गेहूं पहुंच ही नहीं रहा है। उधर क्रय केंद्रों पर जो किसान अब रजिस्ट्रेशन कराने के बाद पहुंच रहै हैं, उन्हें केंद्र प्रभारी कई दिन के टोकन जारी होने की बात कहकर टरका रहे हैं।
यह है पुवायां मंडी परिसर में लगे गेहूं क्रय केंद्रों पर टोकन का हाल-
1. नेफेड सेंटर के प्रभारी रवि राठौर ने बताया कि आठ दिन आगे तक के टोकन जारी हो चुके हैं।
2. यूपीएसएस के प्रभारी शैलेन्द्र भारद्वाज ने दो मई तक के टोकन जारी किए जाने की बात कही
3. भारतीय खाद्य निगम निगम के सेंटर प्रभारी मोहम्मद हनीफ सात मई तक के टोकन जारी होने की बात कह रहे हैं।
4. उत्तर प्रदेश राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम लिमिटेड के प्रभारी अमिताभ गुप्ता के पास 25 मई तक के टोकन जारी, वारदाना भी नहीं।
5. कर्मचारी कल्याण निगम के प्रभारी जमशेद अली के यहां दो मई तक के टोकन जारी।
6. पीसीयू के प्रभारी सौरभ सिंह के पास 26 अप्रैल तक के टोकन जारी।
7. पीसीएफ के प्रभारी दिवाकर प्रजापति के पास पांच मई तक के टोकन जारी
8. सहकारी संघ बड़ागॉव पीसीएफ के प्रभारी रूपेश कुमार के यहां 30 अप्रैल तक के टोकन जारी।
9. आरएफसी प्रथम के प्रभारी महिपाल सिंह के पास दस मई तक के टोकन जारी
10. आरएफसी द्वितीय के प्रभारी पुंडीर के पास आठ मई तक के टोकन जारी।
 
मंडी में कर्मचारी नहीं, आवासों से काट रहे गेट पास
पुवायां। पुवायां मंडी में सारी व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। खास बात है कि गेट पर तैनात गार्ड सिर्फ प्रवेश पर्ची काटता है और गेटपास एक कर्मचारी अपने आवास से जारी करता है। जबकि पूरी लिखा पढ़ी गेट पर ही होनी चाहिए। मंडी सचिव शैलेंद्र कुमार के अनुसार कर्मचारी नहीं होने के कारण परेशानी हो रही है। टोकन संबंधी समस्या होगी तो दूर कराई जाएगी।
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मंडी में गेहूं की आवक कम हो रही है। कई सेंटर प्रभारी भी बता रहे है कि किसान टोकन लेने के बाद आने कम हो गए हैं। प्राइवेट खरीद के रेट बेहतर होने के कारण भी सेंटरों की खरीद पर फर्क पड़ रहा है। कर्मचारी कम होने के कारण गेटपास आवास से भी कट रहे हैं और गेट से भी काटे जाते हैं।
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शैलेंद्र कुमार मंडी सचिव पुवायां
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