रक्षाबंधन पर्व पर जिला जेल का माहौल काफी इमोशनल रहा। नम आंखों के साथ हाथ में मिठाई का डिब्बा, राखी और रोली-अक्षत लिए बहनों ने सुबह से ही भाइयों से मिलाई करने और राखी बांधने के लिए पर्ची लगानी शुरू कर दी थी। उन्हें शुभ समय से कोई लेना-देना नहीं था। उनके लिए यही सबसे बड़ा अशुभ था कि उनका भाई जेल में है। उन बहनों को तो राखी बांधने के लिए नहीं, अपितु भाइयों की रिहाई के लिए शुभ समय का इंतजार था। पर्व पर एक हजार से अधिक महिलाओं ने जेल में बंद भाइयों को तिलक कर मिठाई खिलाई और राखी बांधकर उनके दीर्घायु होने की कामना की।
जेल का माहौल सुबह से ही गमगीन था। सुबह करीब पांच बजे से ही बहनों ने अर्जी लगाकर जेल के नियमों के अनुसार भाइयों को राखी बांधने की अनुमति लेनी शुरू कर दी थी। जेल कर्मियों ने भी उनकी मानवता के नाते काफी मदद की और सुबह लगभग आठ बजे से उनके हाथों में गेट की मोहर लगाकर बंदी भाइयों से मिलने की अनुमति दी जाने लगी थी। बंदियों को मिठाई खिलाने में बहुत सावधानी बरती गई। पहले उन महिलाओं को ही मिठाई खिलाई गई, जो वहां लेकर पहुंची थीं। भाइयों को तिलक लगाकर राखी बांधते वक्त सभी बहनों की आंखें छलछला रही थीं। उनके गले रुंधे थे, वह कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी, फिर भी उन्होंने रुंधे गले से ईश्वर से प्रार्थना जरूर की कि उनके भाई की रक्षा करना। जेल अधीक्षक बिजेंद्र कुमार ने बताया कि पर्व पर करीब एक हजार महिलाओं ने बंदी भाइयों को राखी बांधी। इस दौरान प्रजापिता ब्रह्मकुमारियों ने भी बंदियों को राखी बांधी।