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कर्मों के अनुसार नवीन शरीर धारण करती है आत्मा : आचार्य जितेंद्र

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तिलहर। आर्य समाज परिसर में रविवार को सुबह हुई वैदिक विचार गोष्ठी में आर्य विद्वान आचार्य जितेंद्र सिंह ने अविनाशी आत्मा की विशेषताओं का बखान किया। उन्होंने कहा कि आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है और प्राणी द्वारा किए गए कर्मों के अनुसार नवीन शरीर धारण करती है। उन्होंने कहा कि कर्मशील जीवात्मा अमृत के समान है क्योंकि मृत शरीर जल जाता है, आत्मा नहीं। इसीलिए जीवात्मा के अलग होने पर मृत शरीर को आग से भस्म कर देने का विधान है।
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मंत्री लोकेश आर्य ने आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा लिखित श्रीमद दयानंद प्रकाश और सत्यार्थ प्रकाश के अंश पढ़कर सुनाते हुए सभी से वैदिक मार्ग पर चलने का आह्वान किया। डॉ. गिरीश चंद्र शर्मा और कृष्ण मुरारी ने भजन सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का प्रारंभ वैदिक यज्ञ के साथ किया गया।
इस अवसर पर दासीराम आर्य, बाबा शंभू नाथ आर्य, ओम शंकर आर्य, रविंद्र आर्य सहित काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। गोष्ठी में तय किया गया कि 30 अक्तूबर से दिल्ली में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में तहसील से लगभग 500 लोग जाएंगे। बताया गया कि इस कार्यक्रम में देश के तमाम राजनेता और संत-महात्मा सहित लगभग 40 देशों से आर्य विद्वान शामिल होंगे। संवाद
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