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‘बेटा नहीं देता था खाना, तभी घर छोड़ साधु बनने निकल आए थे’

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शाहजहांपुर। लखीमपुर खीरी के थाना पसगवां के गांव जिंदपुर निवासी रनालाल का ठिकाना अब राजकीय मेडिकल कॉलेज के हड्डी विभाग का बेड नंबर 20 है। उनके बेटे इंद्र कुमार ने उन्हें मृत समझकर अज्ञात शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। मौत के बाद की सारी परंपरा भी पूरी कर ली थीं। रना लाल ने बताया कि उनका बेटा खाना तक नहीं देता था। तभी वह घर छोड़कर साधु बनने चले आए थे। हालांकि, बुधवार शाम को इंद्र कुमार पुलिस के पास पहुंच गया।
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22 अगस्त की सुबह चौक कोतवाली क्षेत्र के अजीजगंज चौकी के पास सड़क किनारे एक बुजुर्ग का शव मिला था। उस शव की पहचान इंद्र कुमार ने अपने पिता रनालाल के रूप में की थी। पुलिस ने शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। मंगलवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज आए भतीजे दिलीप व राजीव ने रनालाल को अस्पताल के वार्ड में पाया। रनालाल ने दोनों के जरिये बेटे इंद्र कुमार के पास खबर भिजवाई थी। रना लाल ने बताया कि बेटा इंद्र कुमार उन्हें खाना नहीं देता था। तभी वह घर छोड़कर चले आए थे। वह गोला मंदिर में दर्शन करने गए थे। इसके बाद हरिद्वार जाने के लिए शाहजहांपुर में रोडवेज बस अड्डे पर पहुंचे थे। लड़खड़ा कर गिरने से पैर टूटने पर उन्हें रोडवेज कर्मी ने अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
रना के नाम दो एकड़ जमीन, उस पर चल रहा मुकदमा
अस्पताल में रनालाल ने बताया कि उनके नाम पर दो एकड़ जमीन थी। तीन साल पहले उसे भी धोखे से बरबर नगर पंचायत में कार्यरत एक व्यक्ति ने अपने नाम लिखवा लिया था। जानकारी में आने के बाद उन्होंने मुकदमा दर्ज करा दिया था। केस में उनके बयान भी हो चुके थे।
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1500 में गिरवी डाली जमीन, भतीजों से मंगाए एक हजार रुपये
रना ने अपनी 14 डिसमल जमीन गांव के व्यक्ति मुन्नू के पास 1500 रुपये में गिरवी डाली थी। मुन्नू ने तब उसे मात्र पांच सौ रुपये दिए थे। बाकी एक हजार रुपये अभी तक नहीं दिए थे। मंगलवार को आए भतीजों से उसने मुन्नू से एक हजार रुपये मंगाए थे। भतीजे अभी वापस नहीं आए हैं।
इंद्र कुमार थाने में हुआ पेश
अपने पिता की जगह किसी दूसरे का अंतिम संस्कार करने वाले इंद्र कुमार की तलाश में कोतवाली पुलिस मंगलवार शाम को जिंदपुरा गांव में पहुंच गई। वहां बेटे इंद्र कुमार से अस्पताल आने के लिए कहा गया। बुधवार शाम को इंद्र कुमार कोतवाली पहुंचा। उसने लिखित में दिया कि उसके पिता जिंदा हैं। इसके बाद वह अपने पिता से अस्पताल में जाकर मिला है। इंद्र कुमार ने जिस शव का अपना पिता समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, उसकी जांच की जाएगी। पुलिस ने पुराने रिकार्ड को खंगाला है।
मामले की जांच की जा रही है। यह पड़ताल कर रहे हैं कि आखिर इंद्र कुमार दूसरे व्यक्ति का शव अपने पिता का समझकर क्यों ले गया था। उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में भी जांच की जा रही है। - संजय कुमार, एसपी सिटी
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