बाढ़ से निपटने को प्रशासन ने शुरू कर दी तैयारियां
पहाड़ों के साथ ही मैदानी इलाकों में भी लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र की सभी नदियां उफान पर है। हालांकि अभी बाढ़ आने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन नदियों के लगातार बढ़ रहे जलस्तर से समीपवर्ती गांवों के अनहोनी की आशंका से घिरे लोग चौकन्ने हो गए है। उधर, ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर प्रशासनिक स्तर से भी तैयारियां शुरू कर दी गई है। तहसीलदार के अनुसार किसी भी बांध से पानी छोड़े जाने की सूचना भी अभी नहीं है।
मालूम हो कि तहसील क्षेत्र का दो तिहाई भाग गंगा, रामगंगा तथा बहगुल नदियों से घिरा होने के कारण यहां बरसात के मौसम में कई बार बाढ़ से भयंकर तबाही हुई, जिसके चलते हर साल बरसात का मौसम आते ही इन नदियों के समीपवर्ती गांवों के लोग अनहोनी की आशंका से घिर जाते हैं। बीते वर्ष 2010 में इस क्षेत्र के लोगों ने भयंकर बाढ़ को झेला था, लेकिन उसके बाद गंगा नदी किनारे ढाईघाट क्षेत्र में बसे करीब आधा दर्जन गांवों को अपवादस्वरूप छोड़ दें तो यह क्षेत्र बाढ़ जैसी आपदा से महफूज रहा। हालांकि इस साल पहाड़ों पर हुई भारी वर्षा के साथ ही क्षेत्र में भी लगातार हो रही बारिश से यह सभी नदियां उफान पर जरूर हैं, लेकिन अभी बाढ़ आ जाने जैसी कोई स्थिति नही है इतना जरूर है कि आपदा के दौरान नुकसान उठा चुके लोग आशंकित है।
उधर, प्रशासन ने भी अचानक बाढ़ आने जैसी स्थिति से निपटने को तैयारी पूरी कर ली है। इस संबंध में तहसीलदार लालता प्रसाद तिवारी ने बताया कि क्षेत्र की सभी 24 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर उन पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है जो स्थिति पर नजर रखकर प्रशासन को सूचना देते रहेंगे। साथ ही नाव आदि की भी व्यवस्था कर ली गई है। उन्होंने बताया कि नदियों का जलस्तर बढ़ा जरूर है, लेकिन इसके बाद भी खतरे जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि किसी बांध से पानी छोड़े जाने की भी कोई सूचना नहीं है।