शाहजहांपुर। शहर में पिछले साल आई बाढ़ के दर्द को जिम्मेदार विभागों ने भुला दिया है। आपदा से बचाव के इंतजाम बैठकों और प्रस्तावों तक ही सिमटे हैं। आठ महीने बाद भी धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है। ढाई महीने बाद मध्य जून से बरसात आने वाली है। ऐसे में शहर पर फिर बाढ़ का खतरा मंडराता दिख रहा है। प्रशासन के लिए अब समय पर बाढ़ से बचाव के काम कराना चुनाैती पूर्ण है।
शहर से निकल रहीं गर्रा और खन्नौत नदियां जुलाई 2024 में उफना गई थीं। इससे आधे शहर का आबादी क्षेत्र डूब गया था। खन्नौत नदी से लोधीपुर, हनुमतधाम के पास का क्षेत्र जलमग्न हुआ था । वहीं गर्रा नदी की बाढ़ ने बरेली मोड़ से लेकर अजीजगंज तक के बड़े इलाके को बुरी तरह से प्रभावित किया था। हजारों लोग आज भी बाढ़ की भयावहता को याद कर भविष्य के मद्देनजर सशंकित हो जाते हैं। शहर में ऐसे मुश्किल हालात फिर से पैदा न हों, इसके लिए डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने सभी संबंधित विभागों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। बाढ़ आने पर बचाव के साथ ही स्थायी विकल्पों पर विचार भी किया गया, लेकिन समाधान अभी तक नहीं हुआ।
बचाव के प्रस्तावों के तहत लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरेली मोड़ से नगरिया मोड़ तक की सभी पुलिया (कल्वर्ट) खोली जानी हैं। अजीजगंज मार्ग को ऊंचा करने, बांध के सुदृढ़ीकरण और ककरा से निकलने वाली नहर की खोदाई कराकर गहरी किया जाना है। ककरा पर बने गर्रा नदी के पुल को ऊंचा करने की बात भी तय हुई है। इसके बावजूद अब तक सभी प्रोजेक्ट पाइपलाइन में ही हैं। इनमें अजीजगंज मार्ग और पुल को ऊंचा कराने का प्रस्ताव सबसे अहम है। दोनों प्रस्तावों को शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बरसात से पहले प्रोजेक्ट कैसे पूरे होंगे।
- सड़क ऊंची करने का प्रस्ताव अटका अजीजगंज देहात स्थित मौजमपुर पंप कैनाल से नगरिया गोपालपुर रिंग रोड पर पीएसएचएल स्थित बाइपास तक 1.5 किमी मार्ग को उच्चीकृत किया जाना है। इसके लिए सात करोड़ 78 लाख 71 हजार रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। गर्रा नदी में पानी बढ़ने पर यह मार्ग बैरियर का काम करेगा। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड को मार्ग का निर्माण करना है। एक्सईएन महेंद्रपाल ने बताया कि सड़क को ऊंचा करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। मंजूरी मिलने पर काम कराया जाएगा। वहीं, सेतु निगम की ओर से ककरा स्थित गर्रा नदी के पुल को ऊपर उठवाया जाना है। इसका प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। पुल नीचा होने की वजह से गत वर्ष बाढ़ आने पर पानी टकराकर आबादी की ओर बढ़ गया था। पुल को ऊपर उठाए जाने का काम चार करोड़ 23 लाख 93 हजार की धनराशि से किया जाना है। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक के पत्र का हवाला देते हुए इस संबंध में डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को 26 मार्च को पत्र भेजा है। माना जा रहा है कि बरसात से पहले पुल को ऊपर उठाने काम पूरा हो सकता है। हालांकि सड़क ऊंची कराने का काम मुश्किल होगा।
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अतिक्रमण को लेकर खामोशी...नदी के बहाव क्षेत्र में बने मकान-दुकान
प्रशासन ने बाढ़ से बचाव के तमाम प्रयास किए लेकिन नदी के मुहाने तक हुए अतिक्रमण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। प्रशासन की अनदेखी से पिछले दो दशक में गर्रा और खन्नौत नदी के बहाव क्षेत्र में मकान और दुकान तनकर खड़े हो गए हैं। इसके बावजूद कई सालों से नोटिस देने तक की कार्रवाई नहीं की गई है। दो दशक पहले जिले की महायोजना में लोधीपुर के खन्नौत पुल से लेकर सूफी संत हजरत बूलनशाह मियां की दरगाह तक नदी के किनारे 119 गाटा नंबरों की जमीनों को डूब क्षेत्र माना गया था। यही हाल गर्रा नदी के आसपास के इलाके का है। डूब क्षेत्र में रिहायशी-व्यावसायिक भवन बन रहे हैं, लेकिन काॅलोनाइजर की मनमानी के आगे प्रशासन खामोश है।
पुरानी पुलिया खुलवाईं...नए की तैयारी नहीं
बरेली मोड़ से लेकर नगरिया मोड़ तक लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे की सड़क ऊंची होने के कारण गत वर्ष बाढ़ का पानी पार होकर दूसरी ओर जाने की बजाय शहर की ओर मुड़ गया था। इस इलाके में हाईवे पर बनीं 10 पुलिया (कल्वर्ट) में से केवल दो ही खुली थीं। इस वजह से बाढ़ का पानी पुलिया से निकलकर दूसरी ओर नहीं गया। डीएम ने सभी कल्वर्ट खुलवाने के साथ आवश्यकतानुसार नए बनवाने के निर्देश दिए थे। एनएचएआई के अधिकारी के मुताबिक सभी कल्वर्ट को खोलकर साफ-सफाई करा दी गई है। नए कल्वर्ट बनवाने के लिए अभी प्रस्ताव नहीं आए हैं।
शुरू नहीं हो सकी बांध की मरम्मत
अजीजगंज क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोगों को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए चार दशक पूर्व गर्रा नदी के किनारे करीब डेढ़ किमी लंबा कच्चा बांध बनाया गया था। पिछले वर्ष बाढ़ के पानी से पुल के पास अजीजगंज मोड़ से लेकर सिंचाई विभाग के पंप कैनाल स्टेशन तक कई जगह बांध की मिट्टी बह गई। पंप कैनाल के पास बांध की मिट्टी बहने से रोकने के लिए बनाई गई ईंटों की पक्की दीवार का करीब 50 मीटर हिस्सा ढह गया था। बांध पर बनाई गई सड़क में भी कई जगह दरारें पड़ गई थीं। सिंचाई विभाग की ओर से बांध को मानसून सीजन के बाद बनवाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक काम की शुरुआत नहीं हो सकी। पुनर्निर्माण अब नए वित्तीय वर्ष में ही हो सकेगा। अधिशासी अभियंता शारदा नहर सुनील भास्कर ने बताया कि अनुबंध की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बरसात से पहले काम पूरा होने की उम्मीद है।
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नहर की खोदाई का हो सका सिर्फ सर्वे
ककरा से निकलकर राजकीय मेडिकल कॉलेज के बगल से चांदापुर होते हुए चौहनापुर जाने वाली नहर चांदापुर तक तो ठीकठाक स्थिति में है, लेकिन इसके आगे बदहाल है। माना जा रहा है कि गर्रा नदी में बाढ़ आने पर नहर से पानी पास हो जाएगा। इसके मद्देनजर चांदापुर से चौहनापुर तक करीब 13.5 किलोमीटर में नहर की सफाई कराकर खोदाई करानी थी। अभी तक सिर्फ सर्वे हो सका है। खोदाई का काम बरसात से पहले होना मुश्किल है। अधिशासी अभियंता नलकूप विपिन कुमार सिंह ने बताया कि नहर की खोदाई के लिए सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। अब बजट निर्धारित कर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसके बाद खोदाई का काम शुरू होगा।
बाढ़ से बचाव के लिए हरसंभव उपाय किए जा रहे हैं। बरसात से पहले सारे प्रस्ताव धरातल पर उतारने का प्रयास रहेगा। गर्रा नदी के ककरा स्थित पुल और वहां से अजीजगंज के 1.5 किमी मार्ग को ऊंचा करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से मंजूरी मिलने पर तेजी से कार्य कराए जाएंगे।
धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डीएम
लोधीपुर में खन्नौत नदी के किनारे तक बने भवन। संवाद- फोटो : संवाद