पुवायां। संरक्षित पशु गोह (विषखोपड़ा) का शिकार करने वाले को बिना कार्रवाई के छोड़ने के मामले में जांच में लापरवाही बरती जा रही है। शिकार के तीन दिन बाद भी पुलिस गोह मारने वाले को तलाश नहीं सकी है।
पुवायां के मोहल्ला कसभरा अस्तल निवासी एक युवक ने 12 जून को गांव में तीन गोह का शिकार किया था। गोह का मांस पकाने से पहले ही किसी ने मामले की शिकायत पुलिस से कर दी। दो दरोगा और दो सिपाही युवक के घर पहुंचे और मंडी पुलिस चौकी ले गए। आरोप है कि बाद में उसे बिना कार्रवाई के छोड़ दिया गया। सीओ प्रवीण मलिक ने मामला संज्ञान में होने और जांच टीम गठित करने की बात कही थी, वहीं रेंजर ने भी वनकर्मियों से रिपोर्ट तलब की थी।
रविवार शाम तक पुलिस और वनकर्मियों की टीम शिकार करने वाले को तलाश नहीं कर सकी, जिससे पकड़कर छोड़े जाने की जांच पूरी हो सके। उधर शिकार करने वाले के मोहल्ले वालों का कहना है कि तीन गोह मारने में तीन लोग शामिल थे।
वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की पहली सूची में शामिल है गोह
एक वनकर्मी ने बताया कि गोह वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की पहली सूची का संरक्षित जीव है। प्रथम सूची के वन्य जीवों में गोह के साथ ब्लैक बक, बंगाल टाइगर, धूमिल तेंदुआ, हिम तेंदुआ, दलदल हिरण, हिमालयी भालू, एशियाई चीता, कश्मीरी हिरण, कस्तूरी मृग, गैंडा, चिंकारा, कैप्ड लंगूर, गोल्डन लंगूर आदि शामिल हैं। इस प्रजाति के जीवों को मारने पर सात साल तक का कठोर कारावास और जुर्माना हो सकता है।
जिस व्यक्ति को बिना कार्रवाई छोड़े जाने की बात हो रही है, उसके अभी बयान नहीं हो सके हैं। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
-प्रवीण मलिक, सीओ पुवायां