शाहजहांपुर। गोविंदगंज स्थित मैथोडिस्ट चर्च सौ से ज्यादा साल की विरासत अपने अंदर समेटे हुए है। इसकी स्थापना वर्ष 1912 में हुई थी। 18 जनवरी, 1912 को एफडब्ल्यू वॉर्न ने इसका लोकार्पण किया। वह उत्तर भारत चर्च संगठन के प्रभारी थे।
चर्च के पादरी वाई जे. दास ने बताया कि यह मैथोडिस्ट बिशप ओपन चर्च के नाम से जाना जाता था। इसके बाद मैथोडिस्ट चर्च इन सदन एशिया के अधीन हो गया और यह सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च के नाम से जाना गया। सात जनवरी 1981 को यह मैथोडिस्ट चर्च इन इंडिया के अधीन हो गया। अब इसकी देखरेख मैथोडिस्ट चर्च इन इंडिया द्वारा की जाती है।
वर्तमान में तीन पादरी इसकी सेवा कर रहे है। इनमें उनके अलावा पादरी अशोक श्रेष्ठा व दारा सिंह शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जिले में मसीह समाज के करीब तीन हजार परिवार हैं। मसीह समाज चर्च में हर वर्ष क्रिसमस के पर्व को धूमधाम से मनाता है।
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25 को धूमधाम से मनाया जाएगा क्रिसमस
- 25 दिसंबर को क्रिसमस त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। पादरी वाई जे. दास ने बताया कि प्रभु यीशू का जन्म येरुशलम की एक गोशाला में हुआ था, जिसको लेकर एक तारा द्वारा संदेश दिया गया था। उस तारे को देखकर उस समय के लोग प्रभु यीशू के दर्शन को पहुंचे थे। आज के समय भी मसीह समुदाय के घरों के ऊपर तारा लगाया जाता है जोकि प्रभु यीशू के जन्म का संदेश देता है। घरों को अच्छी लाइटिंग से सजाया जाता है।