घटना के चौथे दिन गांव बड़े हरेवा में चहल-पहल नजर आने लगी है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों और नेताओं की आवाजाही से ग्रामीणों के मन से खौफ कम होने लगा है। गांव की गलियों में बच्चों की चहल-पहल भी नजर आने लगी है। अन्य जाति के लोगों अपने-अपने काम धंधे पर लग गए हैं।
घटना के बाद गांव पीड़ितों के साथ-साथ गांव में रहने वाले अन्य जाति के लोग भी दहशत में आ गए थे। लोग डर की वजह से अपने-अपने घरों से नहीं निकल रहे थे। गांव की गलियां सूनी हो गई थी। मंगलवार को गांव की गलियों में बच्चों की चहल-पहल नजर आने लगी हैं। अन्य जातियों के लोग भी अपने खेत-खलिहानों की तरफ निकलने लगे हैं। गांव में पुलिस की मौजूदगी और प्रशासन और नेताओं की आवाजाही ने ग्रामीणों के खौफ को कम किया है। नेताओं के पहुंचने पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी हो जाती है। गांव में बच्चे भी गलियों में खेलते नजर आने लगे हैं। गांव हरेवा का सन्नाटा धीरे-धीरे कम होने लगा है।