रविंद्र का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन
जलालाबाद। कोलाघाट पुल के पास रविवार की रात हादसे में बहन का तिलक चढ़ाने जा रहे भाई रवींद्र और उनके भतीजे मोनू की मौत के बाद शादी के कार्यक्रम को घरवालों ने टाल दिया है। जिस घर मे मंगलगीत गाए जाने थे, वहां करुण क्रंदन से मातमी सन्नाटा पसर गया है। सोमवार को पोस्टमाॅर्टम के बाद दोनों के शव गांव पहुंचने पर घर में कोहराम मच गया।
तिलहर क्षेत्र के गांव ढकिया रघा निवासी छेदा लाल ने बेटी अरुणा देवी की शादी कलान क्षेत्र के जखिया गांव के एक युवक से तय की थी। रविवार 23 नवंबर को तिलक जाना था और 30 नवंबर को गांव में बरात आनी थी। रविवार को परिजन तिलक चढ़ाने जखिया जा रहे थे। अन्य लोग चार पहिया वाहनों पर सवार हो गए, लेकिन अरुणा के भाई रवींद्र तिलक में उपहार स्वरूप दी जाने वाली बाइक लेकर रवाना हुए।
उनके साथ उनका भतीजा मोनू भी था। रात करीब नौ बजे उनकी बाइक कोलाघाट पुल से पहले बड़े वाहनों को रोकने लिए रखे एक पत्थर (बोल्डर) से टकरा गई। राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को सीएचसी भिजवाया, लेकिन यहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।
हादसे की सूचना पाकर जखिया पहुंचे अन्य परिजन भी जलालाबाद सीएचसी पहुंच गए। तिलक का कार्यक्रम भी नहीं हो सका। घरवालों के अनुसार रविंद्र दिल्ली में राजमिस्त्री का काम करते थे और बहन की शादी के कारण दो दिन पहले ही घर आए थे। उनकी अभी शादी नहीं हुई थी जबकि मोनू अपने पीछे दो बच्चे छोड़ गए हैं।
उनकी बेटी केवल एक माह की है और अरुणा की शादी के बाद उसका नामकरण कराने की तैयारी थी। हादसे के बाद सभी तैयारियां धरी रह गईं। घरवाले हादसे की वजह प्रशासन की लापरवाही मान रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण ही पुल से पहले बेवजह रखे पत्थरों को हटाया नहीं जा रहा।
रविंद्र का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन