पुवायां। कई वर्षों से आम की फसल कम होने के कारण परेशान चल रहे बागवानों के चेहरे इस बार खिले हुए हैं। कारण है कि इस बार पेड़ों में बौर बढ़िया आने से आम की बंपर पैदावार होने की उम्मीद बनी है। अगर बारिश, आंधी और रोगों से नुकसान न हुआ तो मार्केट में भरपूर आम मिलेगा।
बागवानी करने वालों के अनुसार आम की कई प्रजातियां होती है और पेड़ों में एक साल बौर बढ़िया आता है तो दूसरे साल बौर कम हो जाता है। इस बार सभी प्रजातियों के पेड़ों में बौर बहुत बढ़िया आया है। इससे बाग मालिक के साथ ही ठेकेदार भी खुश हैं। पुवायां नगर में मशहूर लखपेड़ा बाग, राजकीय उद्यान पौधशाला के बाग के अलावा तहसील क्षेत्र में तमाम बड़े-बड़े बाग हैं। लखपेड़ा बाग में तो कई प्रजातियों के पेड़ होने के कारण कई तरह के आमों का स्वाद मिलता है। इन बागों में लगे पेड़ों में बौर आने के बाद से ही रखवाली शुरू हो जाती है। समय-समय पर रोग लगने पर कीटनाशक का छिड़काव करके बचाया जाता है। उद्यान विभाग की ओर से भी आम की फसल को बेहतर करने के लिए बागवानों के लिए सुझाव दिए जाते हैं।
खिल गया है फूल तो न करें कीटनाशक का छिड़काव
उद्यान निरीक्षक एसआर वर्मा का कहना है कि आम के पेड़ पर बौर का फूल अगर खिल गया है तो कीटनाशक का छिड़काव बिल्कुल न करें। बौर को रोगों से बचाने के लिए फंगीसाइड का छिड़काव कर सकते हैं, लेकिन उसमें भी सावधानी यह बरतनी है कि छिड़काव करते समय स्प्रे मशीन की नोजिल आसमान की तरफ होनी चाहिए, जिससे स्प्रे का पानी पेड़ में लगे बौर के ऊपर से फुहार की तरह गिरे, इससे बौर को नुकसान नहीं होगा।
नमी नहीं होने पर बागों में भरें पानी
अगर बाग की मिट्टी में नमी नहीं रह गई है तो बाग में पानी लगाना चाहिए। बौर में जब सरसों के दाने के बराकर फसल आ जाए तो भी बाग में पानी लगाना चाहिए, इससे पेड़ से शुरुआती फसल टूटकर नहीं गिरेगी। बाग की निगरानी प्रतिदिन करें। भुनका या छेदक रोग लगने पर स्प्रे करें, लेकिन स्प्रे करने का समय सुबह या शाम ही होना चाहिए, क्योंकि भुनका आदि पेड़ पर ठंडे में ही बैठते हैं।
इस बार पेड़ों में बौर बढ़िया होने के कारण आम की पैदावार बेहतर होने की उम्मीद बनी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो बागवानों को ज्यादा मुनाफा होने के साथ ही जनता के बीच आम ज्यादा पहुंच होगी। विभाग की ओर से तमाम जानकारियां समय-समय पर लोगों को दी जाती है। इसके अलावा किसी भी समस्या से संबंधित जानकारी कोई भी व्यक्ति ले सकता है, उचित सुझाव दिया जाएगा। - एसआर वर्मा, उद्यान निरीक्षक, शाहजहांपुर