तापमान में गिरावट आने के साथ ही कोहरा और पाला गिरना शुरू हो गया है। इससे रेल और सड़क यातायात भी प्रभावित होने लगा है। इसका असर रोडवेज बसों के संचालन पर भी पड़ता है। कोहरे की अधिकता मेें दृश्यता घटने पर बसें समय से नहीं आ जा पाती हैं। इस बार कोहरे में बसों का संचालन सामान्य बनाए रखने के लिए विभागीय कार्यशाला में बसों की जांच का काम शुरू करा दिया गया है।
रोडवेज के स्थानीय डिपो में कुल 189 बसेें हैं। इनमें अनुबंधित श्रेणी की सभी 77 बसें बेहतर कंडीशन की हैं। परिवहन निगम की 112 बसों में अच्छी फिटनेस वाली अधिकांश बसें लंबे रूट पर चलती हैं। दो लाख किमी से अधिक चल चुकीं निगम की अन्य बसें पॉकेट रूट कहे जाने वाले लोकल मार्गों पर चलाई जा रही हैं।
लॉंग रूट की कुछ बसों को छोड़कर लोकल रूटों पर चलने वाली बसों को मौसम के अनुरूप संचालन लायक बनाया जाना है। इनमेें से कई बसों में फॉग लाइट, शीशा साफ करने के लिए वाइपर, सर्द हवा से बचाव को खिड़कियों पर शीशे आदि लगाए जाने हैं। कई बसों में सारी खिड़कियां शीशों से लैस हैं, लेकिन उन्हें खींचने वाले विंडो कैचर नहीं होने से शीशे जाम हैं। बसों को मौसम के लिहाज से अपग्रेड किए जाने के क्रम में यही सारे काम होने हैं।
सेवा प्रबंधक ने जारी किया सर्कुलर
घने कोहरे में बसों की रफ्तार सामान्य बनाए रखने के लिए परिवहन निगम के सेवा प्रबंधक मनोज कुमार ने क्षेत्र के सभी कार्यशाला प्रभारियों सर्कुलर जारी कर विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। उन्होंने नाइट शिफ्ट में चलने वाली सभी बसों में अनिवार्य रूप से फॉग लाइट और वाइपर लगाने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सर्कुलर मिलने के बाद डिपो की लगभग 25 ऐसी बसें चिन्हित की गई हैं, जिन्हें मौसम के अनुरूप सुविधाओं से लैस किया जाना है।
रात्रि सेवा वाली सभी बसों में चालकों की सुविधा के लिए फॉग लाइट, वाइपर आदि पहले से लगे हैं। हालांकि, यह सारे उपकरण चेक करके उनकी कार्य क्षमता परखी जा रही है। अन्य बसों में फॉग लाइट इफेक्ट के लिए हेडलाइट से सादे बल्ब निकालकर उनकी जगह पीली रोशनी देने वाले बल्ब फिट कराए जा रहे हैं। खिड़कियों के शीशों की लूजनेस चेक की जा रही है। यह सारे काम एक-दो दिन में पूरे कर लिए जाएंगे। - केपी सिंह, फोरमैन, रोडवेज वर्कशॉप