शाहजहांपुर। मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में डॉक्टर और उनके अधीनस्थ ही रुचि नहीं ले रहे हैं। रविवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जलालनगर में दोपहर एक बजे ही डॉक्टर चली गईं। उनके अधीनस्थों ने मरीजों को लौटा दिया। ग्रामीण इलाकों में कुछ पीएचसी पर ही डॉक्टर पहुंचे। शेष जगह फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारियों ने दवा दी।
प्रभा स्कूल के नजदीक वाली गली में पीएचसी जलालनगर के परिसर में अपराह्न सवा एक बजे सन्नाटा पसरा था। डॉक्टर की सीट खाली थी। अस्पताल के गेट पर कदम रखने से पहले ही बाहर धूप में खड़ा कर्मचारी दौड़कर आया और बोला कि डॉक्टर दोपहर एक बजे तक मिलती हैं। वह यहां पार्ट टाइम नौकरी करती हैं। आरोग्य मेले के तहत फार्मासिस्ट से ही दवा लेने के सवाल पर कर्मी ने बताया कि डॉक्टर के जाने के बाद दवा नहीं मिलती है, जबकि नियम के अनुसार सुबह दस से चार बजे तक मेला लगाने के निर्देश हैं।
कुर्रिया कलां गांव स्थित पीएचसी पर आरोग्य मेले में फार्मासिस्ट कृपाशंकर पाठक ने दोपहर 12 बजे तक 18 मरीजों को दवाई दी। अधिकतर मरीज सर्दी, जुकाम, त्वचा रोग से पीड़ित आए थे।
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मेले में फार्मासिस्ट ने देखे मरीज
देवकली। पीएचसी पर फार्मासिस्ट नरेंद्र चौधरी ने 18 मरीजों का परीक्षण कर दवाई दी। यहां पर चिकित्सक की तैनाती नहीं है। सर्दी, जुकाम, बुखार के अधिक मरीज आए। जलालाबाद के गांव कटेली स्थित पीएचसी पर आरोग्य मेले में पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे तक कोई मरीज नहीं पहुंचा। इसके बाद एक-एक कर मरीज आना शुरू हुए। डॉ. रूपक गुप्ता ने परीक्षण करने के बाद दवा दीं। मेले में 22 मरीज आए। इनमें ज्यादातर खांसी, जुकाम के थे। चार मरीज बुखार से पीड़ित मिले। जैतीपुर की पीएचसी खेड़ारठ में फार्मासिस्ट अकरम ने 56 मरीजों का परीक्षण किया। मरीजों को सर्दी से बचाव करने की सलाह दी। संवाद
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-पीएचसी जलालनगर में डॉक्टर की ड्यूटी एक बजे तक रहती है। उसके बाद फार्मासिस्ट को उपस्थित रहकर मरीज देखना चाहिए। यदि ऐसा ना हुआ तो जानकारी कर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट देंगे।
डॉ. मनोज मिश्रा, नोडल अधिकारी
शाहजहांपुर में पीएचसी एमनजई जलालनगर में खाली पड़ा परिसर। संवाद