जैतीपुर की खेड़ा रठ पीएचसी में बंद पड़ा लेबर रूम। संवाद
शाहजहांपुर। जिलेभर में गांव के नजदीक गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराने के लिए शुरू कराए गए केंद्र खुद ही बीमार पड़े हैं। एएनएम व स्टाफ के नहीं आने से मरीजों को दवा तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में गर्भवतियों को प्रसव के लिए मुख्यालय में ही ले जाना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को पड़ताल की गई तो कई अव्यवस्थाएं सामने आईं।
जैतीपुर की पीएचसी खेड़ारठ में बृहस्पतिवार सुबह सवा दस बजे प्रसव कक्ष में ताला लटका था। वार्ड बॉय को छोड़कर अन्य स्टाफ नदारद था। पूछने पर बताया कि प्रसव कराने के लिए स्टाफ नर्स तैनात हैं, लेकिन वह सीएचसी व पीएचसी में कार्यभार देखती हैं।
ऐसे में गर्भवती महिलाओं को सीएचसी रेफर कर दिया जाता है। फार्मासिस्ट न होने से मरीजों को दवा के बगैर ही लौटना पड़ा। पीएचसी की चहारदीवारी टूटी होने के साथ गंदगी की भरमार थी। नजदीक में नाले में गंदगी से मच्छर पनप रहे थे। पुवायां की पीएचसी नाहिल में सुबह साढ़े दस बजे प्रसव कक्ष में ताला लगा मिला। यहां पर तैनात एएनएम भी नहीं थीं।
सीएचसी अधीक्षक पुवायां नरेंद्र पाल ने बताया कि एएनएम की ड्यूटी टीकाकरण में लगी है। उन्होंने पीएचसी में प्रतिमाह 15 से 18 प्रसव होने का दावा किया है।
खुदागंज ब्लॉक के गांव सिउरा में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में प्रसव कराने की व्यवस्था है, लेकिन यहां पर लोग आने से कतराते हैं। वे जैतीपुर सीएचसी में चले जाते हैं, क्योंकि पीएचसी में गंदगी का अंबार है। अस्पताल के सामने गांव का कूड़ा-कचरा और गोबर के उपले जमा रहते हैं। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके सागर ने बताया कि सीएचसी कटरा में कार्यरत सफाईकर्मी सप्ताह में तीन दिन ही यहां आकर सफाई करता है।
जैतीपुर की खेड़ा रठ पीएचसी में बंद पड़ा लेबर रूम। संवाद