बड़े हरेवा गांव में दलित महिलाओं के साथ जो कुछ हुआ, उसकी जितनी भत्र्सना की जाए, कम होगी। ऐसे में सार्वजनिक मंचों पर दलित हितों की झंडाबरदारी करने वाले सियासी चेहरों ने वीभत्स घटना पर चुप्पी साधी तो उसके निहितार्थ भी खोजे जाने लगे हैं। महिलाओं को निर्वस्त्र किए जाने के मामले में सपा, बसपा और भाजपा खेमों में छाई खामोशी से साफ जाहिर है कि नेताओं वोटों की चिंता है, न्याय की नहीं। वे इस शर्मनाक कृत्य में भी अपना नफा-नुकसान खोज रहे हैं।
पहले बात कांग्रे्रस की। मौजूदा वक्त में इस पार्टी के पास खोने को कुछ नहीं है। इसलिए पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने तमाम कांग्रेसियों के साथ हरेवा जाकर पीड़ितों को पुचकारने में देर नहीं की। वैसे भी प्रसाद की कर्म स्थली बदल चुकी है। सो उन्हें यहां के वोटों में नफा-नुकसान की शायद परवाह नहीं है। राजनीतिक दृष्टि से जिले के प्रति उनका यही निस्पृह भाव उन्हें घटना के दूसरे दिन ही हरेवा खींच ले गया।
रही बात अन्य पार्टियों की, तो उन्होंने संगठन स्तर पर पीड़िताओं को सहानुभति का मरहम जरूर लगाया, लेकिन जातिवादी सियासत ने जनप्रतिनिधियों को पीड़ितों से दूरी बनाए रखने की सीख दी। चाहे भाजपा की सांसद कृष्णा राज हों, प्रदेश विधानसभा में भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना हों या फिर जलालाबाद क्षेत्र के बसपा विधायक नीरज मौर्य कुशवाहा। हरेवा कांड पर इनके बोल सुनने को घटना से आहत समाज तरस गया।
हरेवा कांड को कश्यप-धानुक बिरादरी में टकराव के सियासी नजरिए से देखें तो माननीयों की खामोशी बेपर्दा होते देर नहीं लगती। दरअसल, जिले में कश्यप बिरादरी केे लोगों की खासी तादाद है। जलालाबाद और कटरा विधानसभा में यह बिरादरी चुनाव में वोटों के लिहाज से निर्णायक भूमिका निभाती है। दूसरी ओर धानुक बिरादरी सियासी तौर पर किसी का कुछ बिगाडने का माद्दा नहीं रखती।
यह अलग बात है कि धानुक बिरादरी के मिथिलेश कुमार सपा के टिकट पर लोकसभा का पिछला चुनाव जीते थे और पत्नी शकुंतला देवी को भी मौजूदा विधानसभा में पहुंचाने में कामयाबी मिली थी। इसमें उनकी बिरादरी से ज्यादा योगदान मुस्लिम और सपा के पारंपरिक वोटरों का रहा। यही वजह रही कि विधायक शकुंतला देवी ने लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से पीड़िताओं को मुआवजा देने की मांग की, लेकिन इस प्रयास को उनकी अपनी बिरादरी के प्रति उपजी सहानुभूति से जोड़कर देखा गया।
अपवाद के तौर पर सपा के राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा भी हरेवा पहुंचे, लेकिन भत्र्सना के लिए तोल-मोलकर बोले। दो दिन पहले सांसद कृष्णा राज की प्रतिक्रिया मांगे जाने पर उनके मीडिया प्रभारी ने साफ कह दिया कि जब तक पार्टी की टीम अपने स्तर से जांच नहीं कर लेती, मैडम कुछ नहीं कहना चाहेंगी। भाजपा की जांच टीम के हरेवा से लौटने के बाद सांसद को समाज से शिकवा ज्यादा है। विधायक सुरेश खन्ना और नीरज मौर्य राजकाज की व्यस्तता के चलते अभी तक हरेवा के बजाय लखनऊ को तरजीह दिए हुए हैं।
पुलिस कर रही अपना काम: कृष्णा राज
दो दिन पहले विदेश दोरे पर बताई गईं सांसद कृष्णा राज स्वदेश लौट आई हैं, लेकिन अभी यहां नहीं पहुंची हैं। टेलीफोन से संपर्क करने पर बोलीं: जो हुआ, बहुत गलत हुआ। दुख इस बात का है कि महिलाओं ने ही महिलाओं को बेपर्दा किया। पुलिस अपना काम कर रही है और लगातार हो रहीं गिरफ्तारियां इसका प्रमाण हैं।
हरेवा में दोनों पक्ष कमजोर: नीरज मौर्य
बसपा के क्षेत्रीय विधायक नहीं मानते कि हरेवा में कश्यप बिरादरी के लोग बहुसंख्यक और मजबूत स्थिति में हैं। उन्होंने छूटते ही कहा: वहां दोनों पक्ष कमजोर हैं। कार्यकर्ताओं से पता चला कि पुलिस की चूक से यह कांड हुआ। लखनऊ से लौटकर गांव का दौरा करके सरकार को सारे हालात से अवगत कराऊंगा।
लड़की कहीं बालिग तो नहीं: सुरेश खन्ना
भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना ने घटना पर प्रतिक्रिया मांगे जाने के दौरान सवाल किया कि जिस लड़की को लेकर बवाल हुआ, वह बालिग तो नहीं? महिलाओं को निर्वस्त्र करने के अपराध का हवाला देने पर खन्ना बोले: पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए, ऐसा न्याय जो दिखाई भी दे।