पर्दा प्रथा शहर से भले ही गायब हो गई हो, लेकिन ग्रामीण परिवेश में आज भी खुलेपन का रिवाज नहीं है। गांव के परिवेश में पली बढ़ी महिलाएं अब भी परदे को महत्व देती हैं। उनका रहन सहन आज भी वैसा है, जैसा कई दशकों से पहले था। शनिवार को मतदान करने के लिए तमाम महिलाएं टोली में घूंघट डाले वोट डालने जाती दिखीं।
दुल्हन की तरह सजी संवरी महिलाएं लंबा सा घूंघट, शाल, लाल कलर के मोजे और उसके ऊपर पायजेब की रुनझुन करती सधी चाल, कौतूहल पैदा कर रही थी। जब बूथ पर वह मतदान करने गईं तो भी उन्होंने घूंघट की आड़ से ही मतपत्र लेकर अपने मनपसंद प्रत्याशी को वोट डाला। महिलाएं बमुश्किल बात करने को तैयार हुई तो वोट किसके कहने पर डाला के जवाब में कहा अपने मन से वोट दिया है। उधर, कई वृद्ध महिलाओं ने भी परिवार के लोगों के सहारे बूथ पर पहुंचकर वोट डाला।