ग्राम बिलंदपुर में श्रीमद्भागवत कथा सुनातीं कथाव्यास कुमारी छाया दीक्षित। स्रोत: जागरूक पाठक
रोजा। गांव बिलंदपुर में देवस्थान पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को व्यास छाया दीक्षित ने गज-ग्राह संग्राम और नौवें स्कंध (पुस्तक) का संदर्भ लेते हुए अहिल्या के उद्धार की कथा सुनाई। इसके जरिये उन्होंने बताया कि भक्त के अंर्तमन की पुकार व्यर्थ नहीं जाती है।
व्यास ने गजेंद्र की मुक्ति और ग्राह के मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि अपनी प्यास बुझाने सरोवर में उतरे गज का एक पांव ग्राह ने जकड़ लिया। पांव छुड़वाने के लिए दोनों के बीच कई दिनों तक संग्राम चलता रहा लेकिन ग्राह ने उसे नहीं छोड़ा। इस पर गज ने सरोवर से कमल का फूल लेकर भगवान विष्णु को अर्पित किया और कातर स्वर में प्रभू को पुकारा।
गज की करुण पुकार सुनकर प्रभू ने दर्शन दिए और गजराज को मुक्त कराकर ग्राह का भी उद्धार किया। इसके बाद अहिल्या के उद्धार का संदर्भ लेते हुए व्यास ने बताया कि प्रभू भक्तों के भावों को समझते हैं। वह अंर्तमन की पुकार जरूर सुनते हैं इसलिए व्यक्ति को प्रभू की निरंतर भक्ति करना चाहिए। कार्यक्रम में अरविंद कुमार सिंह, अवनीश सिंह समेत श्रद्धालु शामिल रहे। संवाद