शाहजहांपुर। स्कूल से लौट रही बालिका से दुष्कर्म के दोषी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। अदालत ने टिप्पणी की है कि अगर स्कूल जा रही बालिका सुरक्षित नहीं है तो इसका समाज पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।
रोजा थाना क्षेत्र के रहने वाले अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति ने पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि उनकी 12 वर्ष की बेटी कक्षा सात में सरकारी स्कूल में पढ़ती है। राजा का घर स्कूल के पास है। उसकी बेटी जब स्कूल जाती है तो राजा उसे गंदे इशारे करता है। छेड़खानी भी करता है। 19 जुलाई, 2023 को उसकी बेटी पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे लंच के समय स्कूल से घर जा रही थी। तभी राजा ने बेटी को गंदे इशारे किए।
बेटी को पास बुलाकर उसके साथ गलत हरकत करने लगा। बेटी के चिल्लाने पर उसकी सहेलियों ने उसे बचाया। घर आकर बेटी ने उसे बताया तो वह शिकायत करने राजा के घर गया। इस पर राजा और उसके पिता धनीराम ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसे गालियां दीं और धमकी देकर भगा दिया। पुलिस ने दुष्कर्म, एससीएसटी एक्ट और पॉक्सो के तहत रिपोर्ट दर्ज कर राजा के खिलाफ आरोपपत्र अदालत भेजा। अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मनोज कुमार सिद्धू ने राजा को दोषी माना। अदालत ने दोषी राजा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
स्कूल जाती बालिका असुरक्षित...समाज पर दुष्प्रभाव : अदालत
अदालत ने आदेश में टिप्पणी की है कि घटना के समय दोषसिद्ध अपराधी वयस्क था और उसे सही-गलत का ज्ञान था। उसने अवयस्क पीड़िता से दुष्कर्म जैसा गंभीर अपराध किया है। यह बात घर पर न बताने के बाबत पीड़िता को उसके पिता का दूसरा पैर तोड़ने की धमकी दी गई है। पीड़िता को निर्वस्त्र करने के आशय से उस पर आपराधिक बल का प्रयोग किया गया। पीड़िता 12 वर्षीय अबोध बालिका थी जिसके साथ स्कूल जाते समय रास्ते से खींचकर घर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया है। यदि स्कूल जाते समय बालिका सुरक्षित नहीं है तो उसका समाज पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।