श्रीमदभागवत कथा सुनाते आचार्य डॉ. दामोदर दीक्षित। स्रोत: आयोजक
शाहजहांपुर। चित्रा टॉकीज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य डाॅ. दामोदर दीक्षित ने कहा कि काल्पनिक सुख के अभाव का नाम दुख है। बताया कि रूप, विद्या, धन और अधिकार ये चार नशे हैं। संसार के लोग जीवन के लक्ष्य से भटककर इनमें फंस जाते हैं। राग, रोष, ईर्ष्या, मद और मोह यह पांच शत्रु हैं। इनसे बचकर रहना चाहिए। अन्यथा जीवन में कष्ट आने में विलंब नहीं लगेगा।
उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत में संपूर्ण कथा को संक्षेप में कहने का विधान है। लगभग सभी ग्रंथों के अंत में ऐसी व्यवस्था की गई है। बिहार से आए स्वामी सत्यानंद ने उपदेश दिया। रामदुलारे त्रिगुनायत, रायबरेली से आए स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने आशीर्वचन कहे। संचालक आचार्य रामानंद दीक्षित ने रामनाम महिमा पर प्रकाश डाला। कथा में कमलेश खन्ना, सरला खन्ना, चंद्र शेखर खन्ना, रागिनी खन्ना, ओम खन्ना, डाॅ. राम मेहरोत्रा, सोमनाथ कपूर एवं सरिता कपूर, ध्रुवनारायन मेहरा, सुधा मेहरा, राघव आदि का सहयोग रहा। मंगलवार को कथा एवं संत सम्मेलन के पश्चात दोपहर 12 बजे से भंडारे का आयोजन किया जाएगा। संवाद
श्रीमदभागवत कथा सुनाते आचार्य डॉ. दामोदर दीक्षित। स्रोत: आयोजक