शाहजहांपुर। तमंचा दिखाकर नाबालिग से दुष्कर्म करने के दोषी को अदालत ने 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दुष्कर्म पीड़िता के गर्भवती होने पर परिजनों को जानकारी हुई तो उन्होंने मुकदमा दर्ज कराया था। उस समय दोषी भी नाबालिग था।
सिंधौली थाना क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने पांच अक्तूबर 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराकर बताया था कि उनकी 15 वर्षीय बेटी अपने छोटे भाई के साथ रहती थी। चार अक्तूबर को उनके बहनोई ने कॉल कर बताया कि उनकी नाबालिग बेटी से एक नाबालिग ने सात महीने पहले दुष्कर्म किया था। वह सात महीने की गर्भवती है। नाबालिग ने बेटी को धमकाया था जिसकी वजह से उसने किसी को कुछ नहीं बताया।
पुलिस ने नाबालिग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की। पुलिस ने आरोपपत्र किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रेषित किया। किशोर न्याय बोर्ड ने किशोर की आयु 16-18 वर्ष के बीच पाए जाने तथा प्रारंभिक निर्धारण में किशोर अपचारी को अपराध की प्रकृति के विषय में पूर्ण ज्ञान होने के आधार पर, उसके मामले का विचारण वयस्क की भांति करने के लिए पत्रावली न्यायालय में प्रेषित की।
अदालत में पीड़िता ने बयान दिए कि उसकी मां की मृत्यु हो चुकी है और पिता मजदूरी करने बाहर चले जाते हैं। नाबालिग रात में करीब दस बजे घर में घुस आया था और उसने उसके मुंह पर कपड़ा बांध दिया। तमंचा दिखाकर धमकाया और दुष्कर्म किया। उसने कहा कि अगर किसी को बताया तो वह उसके पिता और भाई को मार देगा।
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रेमशंकर ने अभियुक्त को दोषी पाया। उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।