शाहजहांपुर। ओटीटी (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म की मनमानी के खिलाफ लोगों की प्रतिक्रिया अब सामने आने लगी है। बेहिसाब अश्लील दृश्यों और आपत्तिजनक कंटेंट का आरोप लगाते हुए लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि मोबाइल पर प्रसारित सामग्री की जांच के लिए सरकार को किसी नियामक संस्था का गठन करना चाहिए। अन्यथा जैसा विवाद ‘तांडव’ वेब सीरीज को लेकर हो रहा है, उस पर लगाम लगाना आसान नहीं होगा।
इस परंपरा पर लगे लगाम
धार्मिक, जातिगत भावना को आहत करने वाले दृश्यों, संवादों का फिल्मांकन कर सनसनी फैलाकर ज्यादा से ज्यादा दर्शक जुटाना फिल्म उद्योग की परंपरा बनती जा रही है। दोषियों के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त विभिन्न ओटीटी प्लेटफार्म्स को सेंसरशिप के दायरे में लाया जाना जरूरी है। इसके लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
विकास खुराना, इतिहास विभागाध्यक्ष, एसएस कॉलेज
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण आवश्यक
अभिभावक सिनेमाघर या टीवी पर प्रसारित फिल्मों पर तो नजर रख सकते हैं, लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट पर नियंत्रण मुश्किल है। इसलिए बेहतर होगा कि सरकार इन प्लेटफार्म पर परोसी जाने वाली सामग्री में अश्लीलता और अन्य मसलों पर नियंत्रण करे। धार्मिक भावना से खिलवाड़ का अधिकार किसी को नहीं है। तांडव जैसी वेब सीरीज के निर्माता-निर्देशक ध्यान रखें कि ऐसे मुद्दे न लाएं जिन पर विवाद न खड़ा हो।
विम्मी सैनी
किसी का मजाक उड़ाना क्षमा योग्य नहीं
मोबाइल बच्चों के हाथ में भी होता है। ऐसे में ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट पर नियामक होना चाहिए। तांडव वेब सीरीज हो या अन्य फिल्म-धारावाहिक, अश्लीलता या किसी भी धर्म का मजाक उड़ाना ठीक नहीं है। धर्म, रंग, जाति या किसी भी व्यक्ति का मखौल उड़ाने की इजाजत किसी को भी नहीं होनी चाहिए। बेहतर होगा कि अच्छे मुद्दों पर वेब सीरीज बनाई जाए।
नैना आनंद, साउथ सिटी
व्यावसायिक फायदे के लिए कर रहे सब
सिर्फ अपने व्यावसायिक फायदे के लिए किसी की भावनाओं का मजाक उड़ाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। जानबूझकर ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि कोई ऐसा करने की हिम्मत न करे। ओटीटी प्लेटफॉर्म हो या सोशल मीडिया, हर जगह अभिव्यक्ति की आजादी की एक सीमा रेखा तय होनी ही चाहिए।
आजम खां, रंगकर्मी