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बकाया भुगतान और समर्थन मूल्य बढ़ाने से जुड़े सवाल टाल गए गन्ना मंत्री

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शाहजहांपुर। प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा का कहना है कि प्रदेश की भाजपा सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में किसानों में खुशहाली आई है और किसानों के मुस्कराने पर ही मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कान आती है। वह शनिवार शाम गन्ना शोध परिषद के अतिथि गृह में पत्रकारों से मुखातिब थे। बमुश्किल एक घंटे के नोटिस पर आनन-फानन बुलाई गई पत्रकार वार्ता में उन्होंने चीनी मिलों पर बकाया गन्ना के भुगतान और समर्थन मूल्य में वृद्धि जैसे किसानों के हित से जुड़े बुनियादी सवाल टाल दिए और केवल योगी सरकार की उपलब्धियों का बखान किया।
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जिले की चीनी मिलों पर किसानों के बकाया भुगतान से जुड़े सवाल के जवाब में गन्ना मंत्री ने कहा कि पेराई सत्र 2015-16 में केवल 18000 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा गया था जबकि सत्र 2019-20 में 35600 करोड़ रुपये की गन्ना खरीद हुई। साथ ही गन्ना का 83 प्रतिशत भुगतान भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि पेराई सत्र 2018-19 में खरीदे गए गन्ना का संपूर्ण भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने वर्ष 2007 से 2017 के बीच बसपा और सपा शासन काल में 29 चीनी मिलें बंद होने और दस चीनी मिलें बेच दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा शासन काल में डेढ दर्जन चीनी मिलें या तो लगाई गईं या उनकी पेराई क्षमता विस्तार किया गया।
गन्ना मंत्री ने कहा कि प्रदेश के गन्ना रकबा में लगातार हो रही वृद्धि योगी सरकार मेें किसानों की खुशहाली का सबसे बड़ा प्रमाण है, लेकिन तीन वर्ष से 325 रुपये क्विंटल पर स्थिर गन्ना समर्थन मूल्य में वृद्धि की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि गन्ना मूल्य परामर्शदात्री समिति की बीते दिन हुई बैठक की कार्यवाही पर कैबिनेट मीटिंग में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विचार विमर्श होगा। उन्होंने बताया कि गन्ना से इथेनाल उत्पादन में प्रदेश प्रथम स्थान पर है।
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किसान हितैषी नीतियों के कारण आज उ.प्र. गन्ना एवं चीनी उत्पादन के साथ-साथ ऐथनाल उत्पादन में भी प्रथम स्थान पर है। उन्होंने बताया कि गन्ना की कोशा. 0238 प्रजाति में कैंसर जैसी लाल सडन बीमारी की रोकथाम के लिए गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों से वार्ता कर विभिन्न उपाय अपनाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. ज्योत्स्नेंद्र सिंह, जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव, परिषद के प्रसार अधिकारी संजीव पाठक आदि मौजूद रहे।
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