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प्रशासन ने निगरानी में लिया मकसूदापुर मिल का चीनी स्टॉक

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शाहजहांपुर। प्रयागराज उच्च न्यायालय द्वारा चीनी मिलों से किसानों को एक माह में गत सत्र के बकाया भुगतान का आदेश दिए जाने के बाद प्रशासन ने जिले मेें बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल पर बकाया चुकता करने के लिए मिल का चीनी स्टॉक अपनी निगरानी में ले लिया है। निगोही की डालमिया मिल गत पेराई सत्र का किसानों को सारा भुगतान कर चुकी है, लेकिन अन्य चारों मिलों पर 158.12 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य अभी तक बकाया है। इसमें सबसे ज्यादा 132.12 करोड़ रुपये मकसूदापुर मिल पर बकाया है, जिसमें विगत पेराई सत्र 2017-18 की बकाया धनराशि भी शामिल है। गन्ना विकास विभाग एवं चीनी उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में एक माह मेें संपूर्ण बकाया भुगतान नहीं होने की दशा में अन्य मिलों का चीनी स्टॉक जब्त कर उसकी बिक्री से किसानों की देनदारी चुकता कराई जाएगी।
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बीते पेराई सत्र 2018-19 में इस मिल ने 277.56 करोड़ रुपये का 86.25 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा, लेकिन पेराई सत्र 2017-18 के बकाया भुगतान में उलझे रहे मिल के अधिकारी गत पेराई सत्र मेें 145.44 करोड़ का भुगतान कर सके। मकसूदापुर मिल पर 132.12 करोड़ रुपये अभी तक बकाया है, जबकि मिल के स्टॉक में बमुश्किल 80 करोड़ रुपये की चीनी शेष है।
निवर्तमान डीएम अमृत त्रिपाठी के निर्देश पर गन्ना विकास विभाग ने मिलों को बकाया भुगतान एक माह में करने के नोटिस जारी किए। तिलहर सहकारी मिल पर 14.41 करोड़ रुपये, रोजा की अवध शुगर वक्र्स पर 8.79 करोड़ रुपये और पुवायां सहकारी मिल पर 2.69 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। अधिकारी भी मानते हैं कि यह तीनों मिलें हाईकोर्ट के आदेशानुसार एक माह में संपूर्ण भुगतान करने की स्थिति में हैं, लेकिन मकसूदापुर मिल की वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि अपने संसाधनों से संपूर्ण बकाया चुका सके।
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यह सही है कि मकसूदापुर मिल पर बकाया चुकता करने के वित्तीय संसाधन नहीं हैं, लेकिन किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। बजाज ग्रुप की करीब 15 चीनी मिलें हैं और यह सभी पेराई सत्र शुरू होने पर वित्तीय आवश्यकता के लिए आपस मेें लेनदेन करती हैं। पिछले साल मकसूदापुर मिल प्रबंधन ने ग्रुप की अन्य मिलों से धनराशि मंगाकर किसानों को दो साल पुराना भुगतान किया था। इस बार भी मिल प्रबंधन ने यही तरीका अपनाया है। फिलहाल, मकसूदापुर मिल रोजाना औसतन एक करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है। एक माह में संपूर्ण भुगतान नहीं होने पर आख्या शासन के माध्यम से हाईकोर्ट भेज दी जाएगी।
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-डॉ. खुशीराम, जिला गन्ना अधिकारी
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