शाहजहांपुर। गर्रा और खन्नौत नदी के उफान ने शहर के निचले इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से सुभाषनगर कॉलोनी में सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है। कई परिवार घरों पर ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों और रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। कॉलोनी में रह रहे लोग नाव के सहारे घरों से बाहर निकलकर रोजमर्रा का सामान ला रहे हैं। वहीं, खन्नौत नदी का जलस्तर स्थिर होने के बावजूद लोधीपुर समेत कई निचले मोहल्लों में बाढ़ का पानी नहीं घटा है। नदी खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। प्रशासन अब तक 280 लोगों को विस्थापित कर आश्रय स्थलों में पहुंचा चुका है।
सिंचाई विभाग की मंगलवार सुबह आठ बजे की रिपोर्ट के मुताबिक खन्नौत नदी का जलस्तर 148.45 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 148.80 मीटर है। गर्रा नदी खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर नीचे बह रही थी। मंगलवार सुबह दियूनी बैराज से 7360 क्यूसेक और कटना नदी से 6800 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
खन्नौत नदी के तटीय और निचले इलाकों में सोमवार जैसी स्थिति मंगलवार को भी बनी रही। लोधीपुर, बंका घाट, बिसरात, ख्वाजा फिरोज, दलेलगंज, छोटी बिसरात, लौका, नई बस्ती और वाल्मीकि बस्ती में जलभराव से लोगों का आवागमन प्रभावित रहा तो काम-धंधा भी प्रभावित रहे। प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले इलाकों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। राहत और बचाव के लिए नाव और मोटरबोट लगाई गई हैं। बिजली आपूर्ति भी बंद है।
सुभाषनगर में नाव के सहारे जिंदगी
सुभाषनगर कॉलोनी में बरुआ नाले से होकर गर्रा नदी का पानी आसपास के सैकड़ों घरों में घुसने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नाव या ट्रैक्टर के बिना घरों से निकलना मुश्किल है। कई परिवार पलायन कर चुके हैं, जबकि कुछ लोग अब भी घरों में रह रहे हैं। जरूरत का सामान लेने के लिए लोगों को नाव का इंतजार करना पड़ रहा है। कॉलोनी में जगह-जगह नींव भरी होने के कारण मोटरबोट नहीं चल पा रही है। ऐसे में छोटी नावों के सहारे ही लोग आवागमन कर रहे हैं। अनहोनी की आशंका को देखते हुए विद्युत निगम ने मंगलवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई। पार्षद नवनीत विनय सक्सेना ने बताया कि लोग मदद के लिए लगातार फोन कर रहे हैं। उनके अनुसार प्रशासन की ओर से अब तक खानपान की व्यवस्था के लिए मदद नहीं मिली है। अपने स्तर से लोगों की मदद का प्रयास किया जा रहा है।
आश्रय स्थलों में पहुंचे 280 लोग
प्रशासन के मुताबिक खन्नौत नदी के तटीय इलाकों से अब तक 280 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें 80 लोग छोटी बिसरात स्थित आश्रय स्थल, रेती रोड स्थित कल्याण सिंह सामुदायिक केंद्र में सौ और एनटीआई स्थित आश्रय स्थल में सौ लोग ठहरे हैं। विस्थापित परिवारों के पुरुष सुबह कामकाज के लिए निकलते हैं और शाम को वापस आश्रय स्थलों पर पहुंचते हैं।
पूरे मकान में पानी भर गया है। पति-पत्नी अकेले रहते हैं। कुछ बर्तन और चारपाई निकालकर लोधीपुर रोड पर सड़क किनारे रात काटने के लिए मजबूर हैं। आश्रयस्थल में खाने की व्यवस्था ठीक नहीं है।
-पिंकी, लोधीपुर
हमारी गली नहीं बनी है। मुख्य सड़क तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। कई वर्ष पहले पति की मौत हो गई थी। बच्चों के पालन-पोषण के लिए घर में परचून की दुकान खोल ली है। कई दिनों से पानी भरा होने से दुकानदारी ठप है।
- रंजना, लोधीपुर।
घर में जरूरी चीजें खत्म हो गईं। नाव की मदद से मोहल्ले से बाहर निकलकर सामान खरीदा है। फिर नाव से घर लौट रहे हैं। बाढ़ की वजह से घर में जहरीले कीड़े घुसने लगे हैं। बिजली जाने से परेशानी बढ़ गई है।
- पीहू वर्मा, सुभाषनगर कॉलोनी
सुबह से लोगों को घरों से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं। कई लोग जरूरत के सामान की खरीदारी करने के लिए अभी आ रहे हैं। उनको भी घर से लेकर फिर छोड़ रहे है। पानी में कई मगरमच्छ दिखाई दे चुके हैं।
-पतीश, नाविक
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डीएम ने बाढ़ और फसल सर्वे की स्थिति के बारे में दी जानकारी
शाहजहांपुर। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने मंगलवार को बताया कि संभावना है कि गर्रा नदी का जलस्तर अगले 24 घंटों में घट जाएगा और खन्नौत नदी का जलस्तर 48 घंटे में घटने लगेगा। फसलों के नुकसान के लिए सर्वे कराया जा रहा है। राजस्व के साथ कृषि विभाग की टीम को लगाया गया है।
डीएम ने बताया कि रामगंगा नदी खतरे के निशान से 35 सेमी ऊपर होने से जलालाबाद क्षेत्र में हालात बिगड़े हैं। लगातार इसकी निगरानी की जा रही है। गंगा नदी खतरे के निशान से करीब एक मीटर नीचे हैं। इससे जनपद में कोई खास असर नहीं पड़ता है। उन्होंने बताया कि शिकायत मिली थी कि कुछ लेखपाल अतिवृष्टि से हुए फसल के नुकसान का सर्वे सही से नहीं कर रहे हैं इसलिए कृषि विभाग के 150 कर्मचारियों को भी फसल के नुकसान के सर्वे के लिए लगाया गया है।
मानक के अनुसार 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान होने पर प्रति हेक्टेयर 17 हजार रुपये दिया जाएगा। अब तक जनपद में 333 हेक्टेयर फसल का सर्वे किया जा चुका है। इसमें करीब 60 लाख रुपये की मुआवजा राशि बन रही है। प्रयास किया जा रहा है कि एक सप्ताह में फसल नुकसान का सर्वे करा लिया जाए। इसके बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संवाद
हनुमतधाम मंदिर परिसर में भरा खन्नौत नदी का पानी श्रद्धालुओं के लिए आना-जाना बंद कर डाल दिए गए त
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