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Shahjahanpur News: तेज हवा-बारिश ने उमस से दिलाई, किसानों को नुकसान

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अंटा चौराहा पर बारिश से बचाने के लिए सामान को रैनकाेट के अन्दर रखकर जाती महिला। संवाद
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शाहजहांपुर। बारिश और तेज हवा से जहां उमस से राहत मिली है, वहीं मौसम में बदलाव धान की फसल के लिए आफत बनकर आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में तेज हवा के साथ बारिश होने से धान की फसल गिर गई है। इससे किसानों का नुकसान होने का अनुमान है। अधिकतम तापमान में गिरावट आई है। गन्ना शोध संस्थान के मुताबिक, बूंदाबांदी जारी रहेगी और तापमान में और गिरावट हो सकती है।
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पिछले कई दिनों से तेज धूप के साथ ही लोग गर्मी से बेहाल थे। दिन के साथ रात में भी तापमान बढ़ने से लोगों को जूझना पड़ रहा था। मंगलवार की सुबह स्थिति सामान्य थी। धूप भी तेज निकली, लेकिन दोपहर होते-होते मौसम ने करवट ली। बादल छा गए। उसके बाद बूंदाबांदी होने लगी। कई जगह पर तेज बारिश भी हुई।
गन्ना शोध संस्थान के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि मंगलवार सुबह वायुदाब 20 मिलीबार गिरा हुआ था। दोपहर में अचानक से मौसम ने करवट ली। मंगलवार को शाम तक तीन मिलीमीटर बारिश हुई। अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सोमवार को अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस रहा था।
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अधिकतम तापमान में 2.8 डिग्री की गिरावट तो न्यूनतम तापमान में 0.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई। डॉ. मनमोहन सिंह के मुताबिक शाम को वायुदाब 20 मिलीबार फिर से गिर गया। पूर्वी हवा चल रही है। आर्द्रता 95 प्रतिशत है। इससे वातावरण में नमी बनी हुई है। बुधवार को बादल छाए रहेंगे और बूंदाबांदी जारी रहने की संभावना है।

अधिक बारिश से धान की फसल को हो सकता है नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि जिन क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई है। इससे धान की फसल को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचेगा। जहां तेज हवा के साथ बारिश हुई है। वहां धान की पकी हुई फसल गिरने की आशंका बनी रहेगी। इससे ज्यादा बारिश होने पर धान की फसल को नुकसान हो सकता है। मटर, आलू, लाही आदि की फसलों की बुआई चल रही है। खेतों में नमी होने से किसानों को इसका फायदा मिलेगा। सब्जियों को भी बूंदाबांदी से नुकसान नहीं है। खेत में पानी भरने से सब्जियों में नुकसान होने की आशंका रहेगी।

तिल, धान, मक्का की फसलें भीगीं, किसानों को होगा नुकसान


जलालाबाद। मौसम के करवट बदलने के साथ मंगलवार को दोपहर बारिश शुरू हो गई। खेतों में काटकर सूखने के लिए डाली गईं तिल, धान, मक्का आदि फसलें भीग जाने से किसानों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। इस वर्ष अगस्त और बाद में सितंबर माह में दो बार आई बाढ़ ने क्षेत्र के करीब पांच दर्जन से ज्यादा गांवों में बोई गईं धान, तिल, मक्का आदि कई फसलों का बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। बाढ़ उतरने के बाद इन दिनों किसान बची-खुची फसल को समेटने में जुटे हैं। ऐसे किसान बहुत कम हैं, जिन्होंने फसलों को घरों में सुरक्षित रख लिया है। अधिकांश किसानों की कटी हुई फसलें सूखने के लिए खेतों में ही पड़ी हैं। मंगलवार को अचानक हुई बारिश से गर्मी से काफी हद तक सुकून मिल गया, लेकिन तैयार फसलें भीग जाने से किसान परेशान हो उठे हैं। संवाद


बारिश के दौरान तेज हवा से खेतों में गिरी धान की फसल

मिर्जापुर। क्षेत्र के कई गांवों में मंगलवार को दोपहर करीब दो घंटे तक हुई बारिश खेतों में तैयार धान की फसल पर कहर बनकर टूट पड़ी। बारिश के दौरान तेज हवा चलने से पक चुकी सैकड़ों बीघा धान की फसल पानी से लबालब हुए खेतों में ही गिर गई। इससे किसान बेहद परेशान हैं क्योंकि उन्हें अपनी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। पानी से भरे खेतों में फसल गिर जाने से अगले कुछ दिन के लिए फसल की कटाई का कार्य प्रभावित होना तय है। किसानों का कहना है कि धान की कटाई चल रही है, लेकिन अचानक हुई तेज बारिश और हवा ने फसल को नुकसान पहुंचाया है। कई किसान फावड़े लेकर खेतों से पानी निकालने में जुट गए हैं। किसानों ने प्रशासन से फसली नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है। संवाद

अंटा चौराहा पर बारिश से बचाने के लिए सामान को रैनकाेट के अन्दर रखकर जाती महिला। संवाद

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