फैशन इनफ्यूसर प्रियांक कौर सेठी के साथ काली ड्रेस में तबस्सुम खान। स्रोत: स्वयं
शाहजहांपुर। शहर के मोहल्ला तारीन जलानगर निवासी स्व.इश्तियाक उल्ला खां की बेटी तबस्सुम खान की पश्चिमी सभ्यता के कपड़ों ने किस्मत बदल दी। 20 हजार रुपये से शुरू किए गए कारोबार ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया, साथ ही विदेश यात्रा करने का मौका भी मिला।
नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज में शिक्षिका तबस्सुम खान को प्रदर्शनी को देखने का बहुत शौक था। वहीं से उन्हें खुद कुछ करने की ठानी। जमा-पूंजी को लगाकर 20 हजार रुपये से दिल्ली से कपड़े मंगाकर बरेली में प्रदर्शनी में स्टाॅल लगाया।
प्रारंभ में सूट, कुर्ती का स्टॉल लगाने वाली तबस्सुम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने उत्तराखंड के हल्द्वानी, लखनऊ, कानपुर जैसे बड़े शहरों में जाकर प्रदर्शनी लगाई। जान-पहचान बढ़ने के साथ ही महिलाओं के ट्रेंड का पता भी लगा।
महानगरों में विदेशी ब्रांड के कपड़ों की डिमांड पता लगने पर मंगाना शुरू कर दिए। प्रदर्शनी में विदेशों कपड़ों की खूब मांग रहती है। इसके बाद इंडियन ड्रेस की थाईलैंड, बैकॉक, दुबई, जकार्ता में भी प्रदर्शनी लगाई। तबस्सुम बताती हैं कि विदेशों में भारतीय इम्ब्रांडरी व हैडवर्क वाले कपड़ों, सूट, साड़ी आदि को काफी पसंद किया जाता है।
कोरिया, थाईलैंड समेत कई देशों के ड्रेस यहां काफी पसंद किए जाते हैं। वह अब तक प्रदेश के बड़े शहरों समेत दूसरे राज्यों में भी प्रदर्शनी लगा चुकी हैं। कारोबार को शुरू कर वह खुद आत्मनिर्भर बनीं, साथ ही छह अन्य लोगों को रोजगार दिया है। 20 हजार रुपये से शुरू कारोबार लाखों में पहुंच चुका है।