शासन ने भले ही बच्चों में कुपोषण मिटाने के लिए राज्य पोषण मिशन प्रभावी बना रखा हो, सरकारी तंत्र खासकर स्वास्थ्य विभाग इसकी अनदेखी कर रहा है। खुटार ब्लॉक के गोद लिए गए गांव रजमना में बाल पोषण स्वास्थ्य दिवस की समीक्षा करने पर जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी हरीश चंद्र परगाईं के समक्ष यही तथ्य उजागर हुआ। पता चला कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों की देखभाल के लिए दिया जाने वाला अनटाइट फंड दो साल से खर्च ही नहीं किया गया।
अनटाइट फंड मद में स्वास्थ्य विभाग ग्राम पंचायतों को दस हजार रुपये सालाना बजट देता है। इसी धनराशि से पीएचसी और स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर टीकाकरण सहित अन्य जरूरी कार्य किए जाते हैं। समीक्षा से ज्ञात हुआ कि कई साल से एएनएम की नियुक्ति नहीं होने से यह धनराशि खर्च नहीं हो सकी। युवा कल्याण अधिकारी परगाईं ने इसे गंभीरता से लेते हुए ग्राम प्रधान सुरेंद्र कुमार को तत्काल खाता खुलवाकर इस धनराशि का उपभोग बच्चों के हित में करने के निर्देश दिए।
गांव में सफाई व्यवस्था असंतोषजनक पाए जाने और इंडिया मार्क हैंडपंप के नजदीक गंदगी पर खिन्नता व्यक्त करते हुए युवा कल्याण अधिकारी ने कहा कि गंदगी के साथ कुपोषण विरोधी अभियान के कोई मायने नहीं हैं। उन्होंने ग्राम प्रधान को सफाई कर्मी की आवश्यकता को देखते आवेदन देने और आंगनबाड़ी कार्यकत्री को हैंड पंप के पास सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र का स्टाफ और बाल विकास परियोजना की सुपरवाइजर जितनी संवेदनशीलता से कार्य करेंगी, उतनी शीघ्रता से कुपोषण मिटाना संभव हो सकेगा।