एसपी कार्यालय के आंकिक शाखा प्रभारी के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर सदर थाने में गबन का मामला दर्ज कराया गया है। रिपोर्ट में पहले यहां तैनात रहे और अब डीजीपी कार्यालय में तैनात आरक्षी ने याचिकाओं की पैरवी में खर्च की गई रकम के गबन का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। लखीमपुर खीरी के थाना मोहम्मदी के मोहल्ला पूर्वी लखपेड़ा निवासी विनोद तिवारी ने रिपोर्ट में बताया है वह 2012 से 2014 तक शाहजहांपुर पुलिस कार्यालय में रिट सेल में नियुक्त रहा था। इस दौरान उसने उच्च न्यायालय इलाहाबाद/लखनऊ/राज्य लोक सेवा अभिकरण लखनऊ में योजित याचिकाओं की पैरवी मेें अपने पास से 4500 एवं 5500 रुपये खर्च किए। इसके सरकारी बिल एवं रसीद प्राप्त करके एसपी से भुगतान की अनुमति कराकर आंकिक शाखा में नियुक्त मोहम्मद रईस को दे दिए। रईस ने कहा कि बजट आने पर भुगतान की राशि उसके खाते में डाल दी जाएगी लेकिन उसे भुगतान फिर भी नहीं किया गया। आरोप लगाया कि 18 अप्रैल 2013 को आंकिक शाखा प्रभारी ने सरकारी बिल एवं रसीद खुर्द-बुर्द करके गायब कर दी और उनका भुगतान कराकर दस हजार रुपये गबन कर लिए। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। सदर बाजार कोतवाली इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह ने बताया कि 22 जनवरी 2016 में आंकिक प्रभारी मोहम्मद रईस ने आरक्षी विनोद तिवारी के खिलाफ गबन की कोशिश का मामला दर्ज कराया था। उस मामले की जांच भी सदर बाजार कोतवाली के दरोगा आसिफ अली कर रहे हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि सिपाही विनोद तिवारी इन दिनों लखनऊ डीजीपी कार्यालय में नियुक्त है।