त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा लागू चुनाव आचार संहिता के प्रावधान सभी उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों, मतदाताओं, जन प्रतिनिधियों और निर्वाचन कार्मिकों पर प्रभावी हो गए हैं। इनके उल्लंघन का कोई मामला प्रकाश में आने पर संबंधितों के विरुद्ध आईपीसी की विभिन्न धाराओं और अन्य सुसंगत अधिनियमों के अंतर्गत कार्रवाई होगी। हालांकि, इस बारे में आयोग से जारी आचार संहिता संबंधी निर्देश पुस्तिका में सोशल मीडिया पर आचार संहिता लागू करने के बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं दिए जाने से प्रशासनिक अधिकारी असमंजस में हैं।
सोशल मीडिया के व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर, ग्रुप मैसेजिंग आदि माध्यमों का व्यक्तिगत स्वार्थों और जन मानस की सोंच को प्रभावित करने के लिए अक्सर दुरुपयोग किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं। चूंकि, आयोग की आचार संहिता के प्रचार खंड में प्ऱिट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन उसमें सोशल मीडिया का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए लोगों में सहज सवाल उठने लगा है कि चुनाव के दौरान सोशल मीडिया के विभिन्न साधनों पर आचार संहिता लागू होगी अथवा नहीं।
मुख्य विकास अधिकारी एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत पुलकित खरे के अनुसार यह प्रश्न राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष भी लाया गया है। उन्होंने कहा कि आयोग से जारी पंचायत चुनाव आचार संहिता में सोशल मीडिया का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन चुनाव प्रचार में उसका दुरुपयोग रोकने के लिए आयोग से दिशा निर्देश मांगे गए हैं। सीडीओ के अनुसार सोशल मीडिया पर आचार संहिता की भूमिका शुक्रवार तक स्पष्ट हो जाने की उम्मीद है।
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चुनाव आचार संहिता के दिशा निर्देश: एक नजर
0 उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि ऐसा कोई कार्य लिखकर, बोलकर अथवा प्रतीक के माध्यम से नहीं करेंगे जिससे किसी धर्म, संप्रदाय, जाति, वर्ग और राजनीतिक दलों की भावनाएं आहत हों।
0 किसी भी उम्मीदवार के व्यक्तिगत जीवन से संबंधित पहलुओं पर आलोचना नहीं की जाएगी।
0 वोट हासिल करने के लिए जातीय, सांप्रदायिक और धार्मिक भावनाओं को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से उकसाया नहीं जाएगा।
0 चुनाव प्रचार और निर्वाचन संबंधी अन्य कार्यों के लिए मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा आदि पूजा स्थलों का उपयोग वर्जित होगा।
0 चुनाव सभा में गड़बड़ी करना-कराना, वोट के लिए मतदाताओं को रिश्वत, मादक पदार्थ बांटना, डराना-धमकाना निर्वाचन विधि के अंतर्गत भ्रष्ट आचरण ओर अपराध माना जाएगा।
0 प्रत्याशियों की अनुमति के बिना किसी व्यक्ति द्वारा उनके पक्ष में चुनावी विज्ञापन और प्रचार सामग्री प्रकाशित कराए जाने पर संबंधित व्यक्ति आईपीसी की धारा 171-एच के तहत दंडित किया जाएगा।
0 मतदान समाप्त होने के निर्धारित समय से 48 घंटे पहले रेडियो, टीवी और प्रिंट मीडिया में चुनाव प्रचार अभियान पर पाबंदी लागू हो जाएगी।