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ऐसे तो रुकने से रहा चुनाव में काले धन का प्रवाह

Wed, 10 Feb 2016 08:39 PM IST
शाहजहांपुर।
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 एमएलसी के चुनाव में प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को वोटों के लिए लोभ-लालच देने अथवा उन्हें डराने-धमकाने में काला धन की आवाजाही रोकने को तहसील वार मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति करके उनके नेतृत्व में उडनदस्ता टीमें गठित की गई हैं, लेकिन मजिस्ट्रेट अभी अपने अधिकार क्षेत्र से अनभिज्ञ हैं। उन्हें अभी यही पता नहीं है कि नामांकन के बाद से लेकर मतदान होने तक उन्हें कितनी सीमा तक धनराशि के प्रवाह को अनुमति देनी है।
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चुनाव में येन केन प्रकारेण वोट हासिल करने के लिए प्रत्याशियों द्वारा धन शक्ति का बेजा इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। कोई मतदाताओं को डराने-धमकाने के गोला-बारूद और हथियार जुटाने में लिप्त हो जाता है तो कोई लोभ-लालच देकर चुनाव की वैतरणी पार करने के लिए महंगे गिफ्ट बांटने की योजना बनाता है। इन कामों में खर्च होने वाली रकम का आवागमन नामांकन के बाद से लेकर मतदान होने तक बना रहता है।
पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस तरह के कामों के लिए ले जाई जाने वाली धनराशि पकड़े जाने के मामले सामने आ चुके है। इसीलिए एमएलसी के चुनाव में काला धन के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी शुभ्रा सक्सेना ने दो दिन पहले चारों तहसीलों में नायब तहसीलदारों को मजिस्ट्रेट नामित करके उनके नेतृत्व में उडनदस्ता टीमें गठित की हैं। इन टीमों में धरपकड़ के लिए एसआई समेत दो-दो सिपाही भी जोड़े गए हैं।
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उडनदस्ता टीमों को भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार कार्य दायित्व संबंधी विस्तृत दिशा निर्देश भी दिए गए हैं। टीम प्रभारियों को चुनाव के लिए असामाजिक तत्व जुटाने से लेकर मतदाताओं को रिश्वत देने को धनराशि ले जाए संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई करने के निर्देष दिए गए हैं। साथ ही चुनाव से संबंधित सभी बड़े आयोजनों की वीडियोग्राफी कराने को भी कहा गया गया है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि निर्वाचन के उद्देश्य से एक बार में अधिकतम कितनी धनराशि ले जाने की छूट अनुमन्य होगी।
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