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Shahjahanpur News: स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से बिगड़े हालात

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राजकीय मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद
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शाहजहांपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। सीएचसी-पीएचसी पर उपचार नहीं मिलने से मरीज राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। इससे मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों को दिखाने से लेकर दवा लेने तक मरीजों को लंबी कतार में लगकर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। टीकाकरण, एआरवी, विभिन्न योजनाओं की फीडिंग समेत कई कार्य प्रभावित हैं।
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जिले की स्वास्थ्य इकाइयों में करीब 1400 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। नियमितीकरण समेत अन्य मांगों को लेकर संविदाकर्मियों ने आठ अक्तूबर से कार्य बहिष्कार कर धरना शुरू किया था। सीएचसी-पीएचसी पर बड़ी संख्या में स्टाफ संविदा पर होने के कारण उनकी गैरहाजिरी का असर सीधे स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। नियमित कर्मचारियों से व्यवस्था संभालने की कोशिश की जा रही है।
वायरल बुखार, खांसी-जुकाम समेत अन्य बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने के बीच सीएचसी-पीएचसी से मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। पहले मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 1200 से 1500 नए मरीजों के पर्चे बनते थे, लेकिन अब संख्या दो हजार तक पहुंच रही है। 13 अक्तूबर को 2122, 14 को 1750, 15 को 1989 और 16 अक्तूबर को 1680 नए पर्चे बने।
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हड़ताल से ये काम प्रभावित
संविदाकर्मियों की हड़ताल से टीकाकरण का कार्य प्रभावित हुआ है। विभाग नियमित कर्मचारियों से व्यवस्था चलाने की कोशिश कर रहा है। शहरी क्षेत्र में एआरवी लगाने का काम भी कई दिन प्रभावित रहा। आठ अक्तूबर से मरीजों को भावलखेड़ा और ददरौल सीएचसी भेजा जा रहा था। बृहस्पतिवार से यहां एआरवी लगना शुरू हुई, लेकिन अन्य उपकेंद्रों पर अभी यह सुविधा प्रभावित है। आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान, जननी सुरक्षा योजना की फीडिंग, संचारी रोग नियंत्रण अभियान और क्षय रोगियों को दवा वितरण का काम भी प्रभावित हुआ है।

वार्ड बॉय नदारद, तीमारदारों के भरोसे मरीजों का स्ट्रेचर



राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों को सहारा देने वाले ही नदारद हैं। वार्ड बॉय की जिम्मेदारी अब तीमारदारों को खुद निभानी पड़ रही है। मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर वार्ड या जांच कक्ष तक पहुंचना हो तो परिजनों को ही मशक्कत करनी पड़ रही है। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाओं की ऐसी ही तस्वीर सामने आई, जब एक बुजुर्ग महिला अपने बेटे के साथ स्ट्रेचर खींचकर तीसरी मंजिल तक ले जाती दिखी।







ट्राॅमा सेंटर में स्ट्रेचर पर उपचार



मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को स्ट्रेचर नहीं मिल पा रहे हैं। यहां पर मरीजों के आने पर उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर ही उपचार किया जा रहा है। अधिकतर बेड भरे होने के चलते मरीजों को दूसरे भर्ती रोगियाें के वार्ड में शिफ्ट होने तक स्ट्रेचर पर इंतजार करना पड़ रहा है।

नियमित स्टाफ पर बढ़ा बोझ
कांट ब्लॉक की सीएचसी और पीएचसी पर कार्यरत 50 से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. इरफान ने बताया कि वह स्वयं मरीजों को देखकर उपचार कर रहे हैं। सेहरामऊ दक्षिणी में स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट शरीफ अहमद मरीजों का परीक्षण कर रहे हैं, जबकि प्रशिक्षु फार्मासिस्ट दवा वितरित कर रहे हैं। निगोही में अरेली इस्माइलपुर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में हड़ताल के चलते ताला लटका है। इससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण प्रभावित हो रहा है।

एआरवी लगना मुश्किल, टीकाकरण भी प्रभावित
तिलहर। राजनपुर और रमापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर संविदा डॉक्टरों और नर्सों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं फार्मासिस्ट के भरोसे हैं। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण और मरीजों को समय पर दवा मिलने में परेशानी हो रही है। मोहल्ला निजामगंज निवासी शकुंतला ने बताया कि गर्भवती महिला का टीकाकरण कराने के लिए तीन बार आ चुकी हैं, लेकिन हर बार लौटना पड़ा। कुआं डंडा निवासी रामवीर ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद उनका एआरवी नहीं लग पा रही है।
जलालाबाद। सीएचसी दो डॉक्टरों के सहारे चल रही है। चिकित्साधीक्षक डॉ. दिनेश यादव प्रशासनिक जिम्मेदारी के कारण मरीजों को ज्यादा समय नहीं दे पाते। संविदा टेक्नीशियन के हड़ताल पर होने से एक्सरे का काम ठप है। पीएचसी साहबगंज एक फार्मासिस्ट के सहारे चल रही है, जबकि कटेली की पीएचसी बंद है। संवाद

डेंगू-मलेरिया की जांच बढ़ाने के निर्देश



एसीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने सीएचसी सिंधौली का निरीक्षण किया। उन्हें नियमित चिकित्सक और कर्मचारी काम करते मिले, जबकि संविदा कर्मचारी हड़ताल के कारण अनुपस्थित थे। एसीएमओ ने स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लेने के साथ दवाओं के स्टॉक की भी जांच की। एसीएमओ ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जफर अकरम को डेंगू और मलेरिया की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की उपलब्धता का जायजा लिया।

चार दौर की वार्ता बेनतीजा रही
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार जारी रहा। जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेशभर के बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारियों ने जुटकर अपनी मांगों को लेकर रोष जताया। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चार दौर की वार्ता होने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं निकल सका है। कुछ मांगों पर केवल मौखिक आश्वासन दिए जा रहे हैं, जिन्हें प्रांतीय नेताओं ने स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। सभी मांगों पर सार्थक निर्णय लेकर लिखित आश्वासन मिलने पर आंदोलन खत्म करेंगे।

मरीजों का दर्द
संविदाकर्मियों के हड़ताल पर होने से स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ गई हैं। कई बार उपचार के लिए सीएचसी आए, लेकिन दवा नहीं मिल सकी। इससे काफी दिक्कत हो रही है।
-धीरेंद्र यादव, गैसरा, तिलहर


कुछ दिनों से बीमार हूं। सीएचसी आने पर डॉक्टर नहीं मिलते हैं। पूछने पर हड़ताल की जानकारी हुई। स्टाॅफ के अभाव में दवा भी नहीं मिल पा रही है।
-वेदराम सिंह, जोधपुर नवदिया

हड़ताल की समाप्ति के संबंध में शासन स्तर से निर्णय होना है। नियमित कर्मचारियों को उपलब्ध संसाधनों के साथ मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए निर्देशित किया गया है।
-डॉ. विवेक कुमार मिश्रा, सीएमओ

राजकीय मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद

राजकीय मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद

राजकीय मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद

राजकीय मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद

राजकीय मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद

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