शाहजहांपुर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ लगाए जाने के बाद से बाजार में उथल-पुथल शुरू हो गई है। सोना और चांदी के दामों में गिरावट होने के साथ ही शेयर बाजार में उठापटक से निवेशक सहम गए हैं।
उद्यमियों की मानें तो टैरिफ से घरेलू उत्पादों को फायदा मिलेगा। वहीं, बाहर से आने वाली चीजों पर नुकसान होने की संभावना है। टैरिफ की घोषणा के बाद से सराफा बाजार में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया है। एक लाख दो हजार रुपये तक पहुंच चुकी चांदी के दाम अचानक धड़ाम हो गए। इसमें दस हजार रुपये तक गिरावट होने से 92 हजार रुपये प्रति किलो रह गई है।
सोने की चमक भी कमजोर पड़ी है। यह 94 हजार प्रति दस ग्राम था। सोना अब 92 हजार में रह गया है। टैरिफ का असर सीधे तौर पर सोने-चांदी के दामों पर पड़ा है। ऐसे में लोग खरीदारी करने से हिचक रहे हैं। हालांकि, सराफा व्यापारी दाम और गिरने से इन्कार कर रहे हैं।
आईआईए के पूर्व सचिव रोहित गोयल बताते हैं कि हार्डवेयर, कंप्यूटर के पुर्जे, मोबाइल फोन व ऑटोमोबाइल सेक्टर के कल पुर्जे पर टैरिफ का असर देखने को मिलेगा। चीन से निर्यात की नीति बेहतर नहीं होने से व्यापारियों को नुकसान होगा।
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टैरिफ लगने के बाद सोने-चांदी के दामों में कुछ गिरावट हुई है। मांग और सप्लाई पर इसका असर कुछ दिख सकता है। जितने दाम कम हुए हैं आने वाले समय में वह रिकवर हो जाएंगे।
विनोद गुप्ता, सराफा व्यापारी
हाथ से बने उत्पाद, चमड़ा, कालीन आदि उद्योगों को नुकसान हो सकता है, लेकिन दवा और केमिकल आदि पर लोगों को फायदा होगा। टैरिफ का असर लंबे समय तक नुकसान देने वाला नहीं होगा।
अशोक अग्रवाल, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए
टैरिफ से अमेरिका में महंगाई बढ़ने से मंदी आने की संभावना है। ट्रंप का टैरिफ लगाने का मकसद है कि उनके यहां कंपनियां निवेश करें, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रुपये का अवमूल्य नहीं रोक पाने के चलते भारत में मंदी आने की संभावना है।
संजय सक्सेना, सीए
ट्रफ के टैरिफ से पूरे दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। टैरिफ बढने से मंदी आने की संभावना है। इसका शेयर बाजार पर काफी फर्क पड़ेगा। वर्तमान में शेयर बाजार में गिरावट चल रही है। संभावना है कि छह महीने तक बाजार में ठीक-ठाक गिरावट रहेगी, यह एक साल तक आगे बढ़ सकती है।
राजीव भारती, शेयर बाजार एक्सपर्ट
विनोद गुप्ता
विनोद गुप्ता
विनोद गुप्ता