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सियासत के रंग : 50 सालों का टूटा नाता, भगवा हो गया प्रसाद भवन

Thu, 10 Jun 2021 02:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर

सार

  • जितिन के पार्टी बदलने से बदलेगी शाहजहांपुर की सियासी दिशा
  • शुरुआत से ही कांग्रेस की राजनीति प्रसाद भवन के इर्दगिर्द थी
  • अब लगेगा भाजपाइयों का जमावड़ा
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Jitin Prasad - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे जितेंद्र प्रसाद उर्फ बाबा साहब के बेटे जितिन प्रसाद अब भाजपाई हो चुके हैं। दिल्ली में उनकेभाजपा ज्वाइन करने के साथ ही शाहजहांपुर का सियासी पारा भी चढ़ गया। पचास सालों से ज्यादा जिस प्रसाद भवन से कांग्रेस की राजनीति तय होती थी, अब वहां भाजपाइयों का जमघट होगा। बुधवार को भी भाजपा सदस्यों ने वहां मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया।

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प्रधानमंत्री राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के राजनीतिक सलाहकार रहे स्व. जितेंद्र प्रसाद एक समय राष्ट्रीय राजनीति के कद्दावर नेता गिने जाते थे। 1970 में विधान परिषद सदस्य से राजनीतिक कॅरियर शुरू करने वाले जितेंद्र प्रसाद शाहजहांपुर लोकसभा सीट से 1971, 1980, 1984 और 1999 में सांसद रहे थे। वह 1994 से 1999 तक राज्यसभा सदस्य भी रहे थे। राजनीतिक गलियारे में उनकी तूती बोलती थी। सोनिया गांधी के खिलाफ कांग्रेस के अध्यक्ष का चुनाव लड़कर वह चर्चा का केंद्र बिन्दु बन गए थे। 2001 में उनके अचानक निधन के बाद बेटे जितिन प्रसाद ने राजनीतिक विरासत संभाली थी। 

सबसे पहले 2001 में जितिन प्रसाद भारतीय युवा कांग्रेस में सचिव बने। इसके बाद 2004 में वह 14वें लोकसभा चुनाव में शाहजहांपुर से लोकसभा सदस्य बने थे। बाद में शाहजहांपुर सीट सुरक्षित होने पर वह 2009 में लखीमपुर जिले की धौरहरा सीट से लोकसभा चुनाव लड़े और एक लाख 85 हजार वोटों से जीतकर संसद पहुंचे।
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इसके बाद जितिन प्रसाद यूपीए में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के केंद्रीय राज्यमंत्री रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी वह धौरहरा सीट से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने ब्राह्मण चेतना परिषद का गठन किया। पूरे प्रदेश के कई जिलों में कार्यक्रम कर उन्होंने ब्राह्मणों को जोड़ा। इस दौरान कांग्रेस के अंदर उनका विरोध जारी रहा और बुधवार को उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।

भाजपा विधायकों को मिलेगी संजीवनी
राजनीतिज्ञों का मानना है कि जितिन के इस फैसले से भाजपा के उन सभी विधायकों को संजीवनी मिलेगी, जो कांग्रेस छोड़कर प्रदेश विधानसभा में पहुंच तो गए, लेकिन न सत्ता के अधिष्ठान से लेकर व संगठन तक में हाशिए पर रहे। विधायकों की खुशी उस वक्त जाहिर भी हुई, जब ददरौल से भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह ने जितिन की कोठी पर जाकर वहां मौजूद सभी लोगों का अपनी ओर से मुंह मीठा कराया। मिठाई खाने वालों में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष कौशल मिश्रा, युवा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष विश्वदीप अवस्थी व जिलाध्यक्ष रोहित सिंह, अनीस खां आदि शामिल रहे।

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