मौसम की मार, फसल में नमी, कंपनियों ने बनाई खरीद से दूरी
मक्का का ऍथेनाल बनाने सहित बहुपयोगी होने के कारण मांग बढ़ी है। इस कारण मक्का अच्छे रेट पर बिक जाता है। खाद्य पदार्थ बनाने वाली गई कंपनियां भी मक्का अच्छे रेट पर खरीद लेती हैं। किसानों के अनुसार, मक्का की फसल अच्छी हो। इसके लिए जरूरी है कि मौसम साथ दे। पछुआ हवा चलती रहे और मौसम शुष्क रहे तो मक्का ठीक से होता है, लेकिन इस बार पुरवा हवा ज्यादा चली, बीच-बीच में बारिश भी होती रही, जिस कारण मक्का की फसल ठीक से नहीं तैयार हो सकी।
उधर देरी से पकने के कारण धान की मुख्य फसल में देरी होते देख किसानों ने नमी होने के बाद भी मक्का कटवाना शुरू कर दिया। गुणवत्ता ठीक न होने और ज्यादा नमी के कारण बड़ी कंपनियों ने मक्का खरीद के लिए अन्य जिलों का रुख कर लिया है। कुछ शराब कंपनियां और एथेनाल कंपनियां ही मक्का खरीद रहीं हैं।
पिछले वर्ष से 20 हजार रुपये प्रति एकड़ का नुकसान
मक्का गत वर्ष प्रति एकड़ 60 से 65 क्विंटल निकला था। अच्छे रेट मिलने से मक्का प्रति एकड़ 90 हजार से एक लाख रुपये का निकला था। इस बार भी मक्का 60 से 65 क्विंटल प्रति एकड़ निकल रहा है, लेकिन रेट 11 से 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल रह जाने से औसतन प्रति एकड़ 70 हजार रुपये ही मिल रहे हैं। व्यापारी अनूप गुप्ता ने बताया कि बड़ी कंपनियां देशी मक्का खरीदने पर जोर देती हैं, जबकि पुवायां क्षेत्र में ज्यादातर किसानों ने हाइब्रिड मक्का तैयार किया है।
इस साल हो रहा नुकसान
बरौना फार्म पुवायां के किसान दलजीत सिंह ने कहा कि सेंटर लगने से किसानों को मक्का का अच्छा रेट मिल सकता था। पिछले वर्ष से कम रेट पर मक्का बिकने से नुकसान हो रहा है।
गुटैया के किसान सुखदेव सिंह ने कहा कि पुवायां मक्का का हब बन चुका है। यहां लगभग 5333 हेक्टेयर में मक्का हुआ है, लेकिन सरकारी खरीद न होने से मक्का कम रेट में बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। एक सेंटर जरूर लगना चाहिए था।
किसान जगजीत सिंह ने कहा कि सरकार को मक्का करने वाले किसानों को प्रोत्साहन देना चाहिए। शाहजहांपुर में भी सरकारी खरीद होनी चाहिए, इससे किसान को उपज के ठीक दाम मिल सकेंगे।
जिला कृषि अधिकारी विकास कुमार ने कहा कि मक्का की सरकारी खरीद के लिए डिप्टी आरएमओ से लगातार बात हो रही थी। मक्का की सरकारी खरीद के लिए शाहजहांपुर चयनित क्यों नहीं हुआ है, इसकी जानकारी की जाएगी।