शाहजहांपुर हादसा: रोते बिलखते मृतकों के परिजन
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पुलिस के सख्त पहरे को भेदकर अंदर प्रवेश किया। अपनों को तलाश करते हुए एक बेड से दूसरे बेड पर गए। उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे। बेड पर अपनों को पाकर उनका दिल बैठ गया। उपचार के लिए अफसरों के हाथ जोड़े, उनसे गुहार लगाई। अफसरों ने उन्हें संभाला। ग्रामीणों ने कंपकपाते हुए हाथों से फोन मिलाकर अपने घर पर जानकारी दी।
भतीजी के लिए खरीदी थी साइकिल
हादसे में घायल श्रवण की 20 वर्षीय बेटी नेहा को देखकर चाचा राजू बिलख पड़े। उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे। आंसू को पोंछते हुए बोले कि तीन दिन पहले ही भतीजी को स्कूल जाने के लिए साइकिल खरीदकर दी थी। ट्रैक्टर के ड्राइवर की एक गलती ने गांव के लोगों का ऐसा हाल कर दिया।
मेरी बेटी का अच्छा इलाज करा दो
राजकीय मेडिकल कॉलेज में आई महिलाओं में कई के बच्चे जख्मी हुए हैं। सभी भगवान से प्रार्थना करने के साथ ही अफसरों से बेहतर उपचार कराने की गुहार लगा रहे थे। वे कह रहे थे कि बेटी का बेहतर से उपचार करा दो। महिला पुलिस ने उन्हें पानी पिलाया और बेहतर उपचार होने की बात कहते हुए चुप कराया।