शाहजहांपुर। रोशनी के त्योहार यानी दिवाली में 24 दिन बचे हैं। इससे पहले धनतेरस व करवाचौथ जैसे पर्व भी करीब हैं। शहर की सड़कों और बाजारों में भीड़ बढ़ेगी, इस बीच सुरक्षा की दृष्टि से सेफ सिटी योजना के तहत 13 चौराहों पर लगे 150 कैमरे खराब पड़े हैं। जबकि, आईटीएमएस के भी 144 कैमरे बंद हैं। त्योहार में वारदात होने पर पुलिस के सामने घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ना चुनौती बन सकता है।
नगर निगम ने सेफ सिटी योजना के तहत शहर में 600 कैमरे लगाए थे। इसके जरिये प्रत्येक सड़क की निगरानी करने की कार्ययोजना बनाई गई थी। लेकिन धीरे-धीरे यह कैमरे खराब व दिशाहीन होते चले गए। निगम की जांच में 150 से अधिक कैमरे क्रियाशील नहीं मिले। ऐसे में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा होने लगा है। इनमें कई कैमरे ऐसे स्थानों पर लगे हैं, जहां त्योहारों के दौरान भीड़ गुजरती है। इसी तरह शहर के 13 चौराहों पर 43 करोड़ रुपये की लागत से 144 कैमरे सहित इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) भी बंद पड़ा है। प्रत्येक चौराहे पर 12 और तिराहे पर नौ कैमरों के माध्यम से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के ऑनलाइन चालान के साथ लोगों की निगहबानी की तैयारी थी। कैमरों के बंद होने पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
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यहां से हटाए गए कैमरे
-कवि तिराहा और लाल इमली चौराहे पर सड़क निर्माण के चलते आईटीएमएस बंद है। बरेली मोड़ और मेजबान होटल के पास लगे आईटीएमएस सिस्टम हटा दिए गए हैं। सुदामा प्रसाद चौराहा, घंटाघर, राजघाट चौकी, अंटा चौराहा, केरूगंज तिराहा, पुत्तूलाल चौराहा और महिला थाना समेत कई स्थानों पर भी आईटीएमएस काम नहीं कर रहा है। नगर आयुक्त ने यातायात पुलिस को जरूरत वाले स्थानों को चिह्नित करने के लिए पत्र लिखा है।
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प्रतिमाओं की नहीं हो रही निगरानी
-22 मार्च की रात नगर निगम परिसर में जेसीबी मशीन से शहीद प्रतिमाएं हटाने के दौरान वे क्षतिग्रस्त हो गई थीं। आसपास लगे कैमरे खराब होने के कारण घटना की तस्वीर सामने नहीं आ सकी। अब प्रतिमाओं के पास लगे कैमरे फिर खराब बताए जा रहे हैं।
कैमरों से पहले खुल चुके हैं कई मामले
-पिछले वर्ष कच्चा कटरा मोड़ पर धार्मिक स्थल के पास मांस की बोरी मिलने के बाद हुए हंगामे की जांच में सार्वजनिक कैमरों से महत्वपूर्ण सुराग मिले थे। कैमरे में एक व्यक्ति रिक्शे से पशुओं के मांस के अवशेष ले जाता दिखाई दिया था।
-26 जून को तारीन टिकली में कार की टक्कर से डेयरी संचालक की मौत पर कैमरे खराब मिले थे। बाद में हंगामा होने पर पुलिस ने कुछ दूरी पर दूसरा कैमरे से फुटेज निकालकर कार की तलाश की थी।
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जिले में 22 हजार कैमरे होने का दावा
-पुलिस का दावा है कि जिले में करीब 22 हजार कैमरे लगे हैं। ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत व्यापारियों और लोगों के घरों के बाहर लगे कैमरों के आईपी एड्रेस पुलिस ने जुटाए हैं। जरूरत पड़ने पर इन कैमरों से भी निगरानी की जाती है। पेट्रोल पंपों पर लगे कैमरे भी पुलिस के लिए मददगार साबित होते हैं।
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वर्जन
-खराब कैमरों को लेकर संबंधित अधिकारियों को मरम्मत कराने या बदलने के निर्देश दिए गए हैं। सड़कों के निर्माण की वजह से कुछ स्थानों पर आईटीएमएस बंद है। जहां इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है, वहां इसे जरूरत के अनुसार शिफ्ट कराने के लिए यातायात पुलिस को पत्र लिखा गया है।
- सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त
विवेकानंद तिराहे पर लगे बंद कैमरे। संवाद- फोटो : 1
विवेकानंद तिराहे पर लगे बंद कैमरे। संवाद- फोटो : 1
विवेकानंद तिराहे पर लगे बंद कैमरे। संवाद- फोटो : 1
विवेकानंद तिराहे पर लगे बंद कैमरे। संवाद- फोटो : 1