संतराम के परिवार में काफी खुशहाली थी। वह अपने चार भाइयों विजय, कुलेंद्र और अनिल के बीच तीसरे नंबर पर था। रामवती और पिता गुरुबक्श संतराम की बात को मानते थे। हरेंद्र पहले भी गुरुबक्श पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहा था, लेकिन संतराम इसके लिए तैयार नहीं था। इसी वजह से आरोपियों ने संतराम को मौत के घाट उतार दिया। संतराम अपनी पत्नी मोहनी से बेहद प्रेम करता था। वह मजदूरी करता था, जबकि मोहनी घर में मवेशियों के पालती थी। दोनों काफी मेहनती थे। संतराम रोजाना सुबह मोहनी को अपने साथ शौच के लिए ले जाता था। गांव में दुश्मनी होने की वजह से वह मोहनी का काफी ध्यान रखता था। संतराम के तीन बेटे छह वर्षीय विक्की, चार वर्षीय टिक्की और तीन वर्षीय सुमित है।
बसपा जिलाध्यक्ष ने दी सांत्वना
बसपा जिलाध्यक्ष उदयवीर सिंह ने पोस्टमार्टम हाउस पर मृतक के पिता गुरुबक्श से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह लोग उनके साथ हैं। आरोपियों को गिरफ्तारी की मांग पुलिस अधिकारियों से करेंगे।
पुरानी रंजिश के चलते संतराम की हत्या की गई है। मामले में दो आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों को गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- अनुराग दर्शन, सीओ सदर