खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई निपटने के बाद किसानों को यूरिया, डीएपी आदि रसायनिक खादों की किल्लत परेशान करने लगी है। हालांकि, अफसर कहते हैं कि राजकीय भंडारों और सहकारी समितियों पर प्रचुर मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बावजूद खाद का संकट बताकर किसानों से अधिक मूल्य लेने वाले थोक और फुटकर विक्रेताओं पर एफआईआर कराने का निर्णय किया गया है।
फसली सीजन चाहे रबी का हो या फिर खरीफ और जायद का, फसलों की बुवाई के बाद से यूरिया, एनपीके और डीएपी आदि रासायनिक खादों की मांग एकाएक बढ़ जाती है। बीते वर्ष खरीफ और चालू वर्ष की शुरुआत के रबी सीजन मांग के सापेक्ष सभी राजकीय उर्वरक भंडारों और सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया भेजी गई। सहकारी समितियों के गोदामों पर भी बुवाई रकबा के सापेक्ष यूरिया उपलब्ध कराई गई, लेकिन लघु और मध्यम जोत वाले किसान आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक पाने को छटपटाते रहे।
सहकारी समितियों पर दबंगों की मनमानी हावी
जिले में करीब साढ़े चार लाख किसान हैं। इनमें अधिसंख्य वे किसान होते हैं, जिन्हें पिछली फसल में नुकसान होने पर नए बुवाई सीजन में फसली लागत लगानी कठिन हो जाती है। सहकारी समितियों को इन्हीं किसानों को खाद-बीज के संकट से उबारने के लिए उर्वरकों का स्टॉक भेजा जाता है, लेकिन उस पर समिति के कर्मचारियों और क्षेत्र के दबंगों का वर्चस्व कायम हो जाता है। छोटे किसान यूरिया के एक-दो बैग पाने के लिए लाइन में लगे रह जाते हैं और बड़े किसान ट्रालियों से रसायनिक खादों की बोरियां ढो ले जाते हैं।
इस तरह बढ़ा दिए जाते हैं उर्वरकों के दाम
खुले बाजार में उर्वरकों के थोक और फुटकर विक्रेता राजकीय गोदामों और सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता घटने पर कड़ी नजर रखते हैं। रसायनिक खादों के किसानों का भटकाव शुरू होते ही खुले बाजार में उपलब्ध स्टॉक को छिपाने और खाद की बोरियों के साथ जाइम टैगिंग करके रेट बढ़ाने का खेल शुरू कर दिया जाता है। मसलन, यूरिया के जिस बैग की कीमत 335 रुपये नियत की गई, उसके साथ जिंक सल्फेट और जाइम खरीदने को बाध्य करके किसानों से उसकी अतिरिक्त कीमत वसूली जाती है।
उत्पादकता बेहतर होने पर जाइम अनावश्यक
कृषि विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि यदि खेत की मिट्टी में जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में हैं तो वहां बोई गई फसल को सिर्फ उर्वरकों की जरूरत होती है, जाइम की नहीं। दरअसल, जाइम फसलों की बढ़वार में टॉनिक का काम करते हैं। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि यदि कोई व्यक्ति भरपूर पोषक आहार ले रहा है तो उसे टॉनिक की जरूरत नहीं पड़ती। इसके विपरीत विक्रेता जाइम की बिक्री के बहाने उर्वरकों के साथ जाइम की कीमत भी जोड़ लेते हैं। प्रमुख सचिव कृषि ने इसी गोरखधंधे पर कड़ाई से रोक लगा रखी है।
जिले में उर्वरकों के लगभग 16-17 थोक और करीब 400 से अधिक फुटकर विक्रेता हैं। इन सभी को शासनादेश के अनुरूप सचेत किया जा चुका है कि निर्धारित कीमत से अधिक मूल्य पर उर्वरक बिक्री नहीं करें। यह निर्देश भी दिए गए है कि रसायनिक खादों के साथ जिंक-जाइम आदि की टैगिंग न करें। इस बाबत किसानों से शिकायत मिलने पर जांच करके संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - राधाकृष्ण यादव, उप निदेशक कृषि