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Shahjahanpur News: रामगंगा में उफान बढ़ने से तटीय गांव बन गए टापू

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जलालाबाद के गांव बड़ी कसारी के रहने वाले कलक्टर अपनी पत्नी गुड्डी व दो बच्चों के साथ जलालाबाद के
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जलालाबाद (शाहजहांपुर)। रामगंगा में उफान जारी रहने से क्षेत्र के कई तटीय गांवों में बाढ़ की स्थिति विकराल होने लगी है। अल्हागंज से लेकर यहां के खंडहर क्षेत्र तक दक्षिण पश्चिम दिशा में रामगंगा और बहगुल नदियों के किनारे बसे दो दर्जन से ज्यादा गांव चारों तरफ पानी से घिर चुके हैं। साथ ही हजारों एकड़ खेत जलमग्न हो गए हैं। कसारी, बलदेवपुर, हथिनापुर, शाहपुर तथा शेरपुर चुरघुटी गांवों में बाढ़ का पानी गांव की बस्ती व गलियों में घुस चुका है जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
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नदियों के किनारे यहां से अल्हागंज तक करीब 20 किमी के दायरे में हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। खंडहर क्षेत्र के गांव बलदेवपुर के बाद सोमवार से कोलाघाट पुल के पास कसारी गांव जाने वाले मार्ग और कोलाघाट के आगे रामगंगा और बहगुल नदियों के बीच खादर में बसे करीब एक दर्जन गांवों तक पहुंचने वाले रास्ते भी करीब दो फुट पानी में डूब चुके हैं और सड़क के ऊपर से तेज बहाव हो रहा है।
वहां प्रशासन द्वारा दी गई नाव से लोग आवाजाही कर रहे हैं। कसारी और बलदेवपुर में नाव उपलब्ध होने के बाद भी ग्रामीण पानी के तेज बहाव वाले जोखिम भरे रास्ते से निकल रहे हैं।
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बाढ़ में डूबे तिल, उर्द, बाजरा तथा पालेज के खेतों में ज्यादा दिन पानी का भराव रहने से फसलों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ से भरतौली, सुगसुगी, शाहपुर, बलदेवपुर, हथिनापुर, शेरपुर चुरघुटी, तेरा, मड़ैया गुजरान, हवा मड़ैया, रघुनाथपुर, खंडहर, कोला, रैपुरा, मंझरा, कसारी, संगहा, रामपुर ढका डांडी, उइला, कुंडरा, पहाड़पुर, चितरऊ, थाथरमई, रामपुर और बीघापुर गांव ज्यादा प्रभावित हैं।
कसारी, भरतौली, ठिगरी,रामपुर और मंझारा गांवों के लोग भूमि कटान के साथ बाकी बचे खेतों में पानी भर जाने से बाढ़ की दोहरी मार झेलने के लिए मजबूर हैं। तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में बराबर नजर रखी जा रही है। जरूरत के मुताबिक विभिन्न गांवों में आवागमन के लिए 16 नावें उपलब्ध कराई गई हैं। तीन शरणालय भी तैयार हो रहे हैं। बलदेवपुर गांव के पास टूटे तटबंध की मरम्मत का काम नदियों में पानी कम होने पर ही हो सकेगा।
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पशुओं के लिए मुसीबत लेकर आई बाढ़
जलालाबाद। बाढ़ के कारण पालतू पशुओं के लिए हरे चारे का संकट बढ़ गया है। छुट्टा पशुओं का हाल और भी बुरा है। पशु भूख से व्याकुल हैं, क्योंकि घास के मैदान और खेतों की मेड़ें डूबी हुईं हैं। ये पशु सड़कों पर डेरा जमाए हुए हैं। संवाद
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गंगा का पानी बढ़ने से दो जगह डूबा शमसाबाद स्टेट हाईवे
मिर्जापुर। गंगा का जलस्तर बढ़ने से जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे दो स्थानों पर डूब गया है। चौरा गांव के पास करीब 200 मीटर हिस्से में दो फुट से अधिक पानी बह रहा है। नगला बसोला के सामने पुलिया की दीवार टूटने से करीब 50 मीटर हिस्से में तेज बहाव के साथ पानी निकल रहा है। इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर बाइक से निकल रहे हैं।
पैलानी उत्तरी, इस्लामनगर, आजादनगर और मस्जिद नगला के संपर्क मार्ग डूबने से नाव के बिना आवागमन मुश्किल हो गया है। नगला बसोला के पास निजी नाव से बाइक समेत लोगों को दूसरी ओर पहुंचाया जा रहा है। रामगंगा की धार से मौजमपुर संपर्क मार्ग भी कट गया है। सोहड़, कुंडरी, मई धीरगंज, दहेलिया, धिरोला, माधोपुर, पहाड़पुर, सिठौली, भरतापुर, हरिहरपुर, कुनिया, गहवरा, आलमगंज, गुलड़िया, तारापुर, पाठकपुर, कुतलूपुर, सिंघापुर और औरंगाबाद के खेतों में धान, तिल और बाजरा की फसलें डूब गई हैं।
एसडीएम आशुतोष सिंह ने बताया कि जलस्तर की निगरानी के साथ ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है। संवाद

तटीय गांवों पर फिर मंडराया बाढ़ का खतरा
तिलहर। गर्रा नदी का जलस्तर मंगलवार शाम तक करीब दो फुट बढ़ने से तटीय गांवों में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ गया है। जिकड़ीपुर, चितीबोझी, घनश्यामपुर, बरहा मोहब्बतपुर, आजमाबाद, रटा रटी और परसेली की ओर पानी बढ़ रहा है। सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न होने से किसान परेशान हैं। एसडीएम आदित्य श्रीवास्तव ने बताया कि राजस्व टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में नुकसान का सर्वे कर रही हैं। कटान रोकने के लिए मिट्टी से भरे बोरे लगवाए जा रहे हैं। गोताखोरों समेत राहत और बचाव टीमें सक्रिय हैं। संवाद

जलालाबाद के गांव बड़ी कसारी के रहने वाले कलक्टर अपनी पत्नी गुड्डी व दो बच्चों के साथ जलालाबाद के

जलालाबाद के गांव बड़ी कसारी के रहने वाले कलक्टर अपनी पत्नी गुड्डी व दो बच्चों के साथ जलालाबाद के

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