अल्हागंज के बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे पर रामगंगा नदी के ऊपर बने पुल का टूटा ज्वाइंट। संवाद
अल्हागंज। बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे पर बने करीब पांच दशक पुराने रामगंगा पुल की मरम्मत का काम दो सप्ताह से ज्यादा समय बीतने पर भी पूरा नहीं हो सका है। एक लेन बंद होने से दूसरी लेन से ही दोनों ओर के वाहन निकाले जाने से पुल के दोनों ओर आए दिन लंबा जाम लग रहा है।
करीब 680 मीटर लंबे रामगंगा पुल का निर्माण वर्ष 1970 से शुरू हुआ था। वर्ष 1972 में पुल का निर्माण पूरा होने के बाद भी उसकी भार वहन क्षमता की जांच कार्य में देरी से पुल काे यातायात के लिए चार साल बाद वर्ष 1976 में खोला गया। उस दौरान हाईवे पर यातायात बहुत कम था। तब से यातायात करीब तीन गुना बढ़ चुका है।
इसे देखते हुए हाईवे को फोरलेन बना दिया गया, लेकिन रामगंगा पर दूसरा पुल बनाने की जरूरत नहीं समझी गई। नतीजे में वाहनों के भारी बोझ से पुराना पुल जर्जर होता गया। हर साल मरम्मत कराने पर भी पुल पर कई जगह उसके जोड़ बार-बार खुल रहे हैं। करीब एक माह पहले पुल पर दो स्लैब के बीच वाले चार जोड़ क्षतिग्रस्त हो जाने से वहां की सड़क भी उखड़ गई।
इसकी जानकारी पाकर हाईवे का रखरखाव करने वाली कंपनी के ठेकेदार ने दो सप्ताह पहले पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों को खोलकर काम शुरू किया। ज्वाइंट के आसपास की सड़क को खोदकर क्षतिग्रस्त हिस्से बाहर निकाले गए। इसके बाद ज्वाइंट के गर्डरों की वेल्डिंग और उन्हें मजबूती देने का काम शुरू किया गया।
बाद में रामगंगा में बाढ़ आने और डबरी घाट पर खतरे के निशान से ऊपर चले जाने से सुरक्षा के लिहाज से पुल की मरम्मत का काम रोक दिया गया। अब उफान घटने के साथ रामगंगा खतरे के निशान से नीचे आ गई, लेकिन पुल की मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका है। नतीजे में पुल पर जाम लग रहा है। पुल को उसकी सामान्य स्थिति में दो-तीन मिनट में पार किया जा सकता है, लेकिन वहां जाम लगने पर लोगों को पुल पार करने के लिए एक-डेढ़ घंटा खपाना पड़ रहा है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) के पीडी अमन त्रिगुन ने बताया कि कार्य प्रगति पर है, जिसे एक सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा।