पौराणिक साक्ष्यों ने राह की आसान
इतिहासकार विकास खुराना ने बताया कि देश में अनेक स्थानों पर भगवान परशुराम जन्मस्थली के दावे किए जाते हैं। डॉ. ब्रह्मानंद शुक्ला की पुस्तक भगवान परशुराम महागाथा शोध ग्रंथ में ऐसी दस अनुसूचियां रेखांकित हैं जिससे पता चलता है कि भगवान परशुराम जी का जन्म अपने शाहजहांपुर के जलालाबाद क्षेत्र में ही हुआ था। ऐसे ही कई साक्ष्य रहे जिसने जलालाबाद का नाम बदलने की राह आसान की।
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यहां 20 फुट ऊंचे टीले पर भगवान परशुराम जी का मंदिर है। इसके मुख्य द्वार पर फरसा लगा हुआ है। यह फरसा तत्कालीन तहसीलदार प्रभु दयाल को वर्ष 1903 में खोदाई करते समय मिट्टी में दबा मिला था। इसके अतिरिक्त खरोष्ठी भाषा में लिखे दो लेख भी यहां मिले हैं।
संलग्न दरगाह से मिली उर्दू की पुस्तक तस्वीर-ए-मासूम-उल रऊफ रहनुमाये तरीकत बताती है कि जब शाह रहमत उल्लाह अलैह निजाम साबरी मियां जिन्हें राजकुमार मियां भी कहा जाता है, अपने शिष्य मुस्ताक दीवान के साथ इस कस्बे में आए तो आबादी नहीं थी। उत्तर की और कुछ हिंदू योगी साधु रहते थे, तब भी मंदिर यहीं पर स्थित था।
परशुरामपुरी स्थित रामताल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसलिए पड़ा था जलालाबाद नाम
निजाम शबरी का समय 1034 के आसपास का है। पुस्तक के विवरण से स्पष्ट है कि इस स्थान का नाम पहले जोगीखेड़ा था तथा प्रयागराज में इसे परशुरामपुरी के नाम से जाना जाता था। बाद में यहां शासक रहे हकीम अहमद खान ने अपनी मंझले पुत्र जलालुद्दीन का विवाह यहां कर पूरा क्षेत्र मेहर में अपने पुत्रवधू को दे दिया। इसमें इस क्षेत्र का नाम जलालाबाद चर्चित हुआ। शाहजहांपुर गजेटियर इसके नामकरण को सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी तथा जलालुद्दीन अकबर से जोड़ता है।
भगवान परशुराम मंदिर से थोड़ी दूर महर्षि जमदग्नि तथा माता रेणुका का आश्रम तथा ढकीयाइन देवी का मंदिर है। इसके अलावा भी अन्य पौराणिक साक्ष्य हैं जिनसे यहां पर ही भगवान परशुराम का जन्म लेना स्पष्ट होता है।
परशुराम मंदिर प्रांगण मे निर्माणाधीन बहुउद्देशीय हाल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
30 करोड़ की धनराशि से संवारी जा रही है जन्मस्थली
जन्मस्थली घोषित होने के बाद मंदिर प्रांगण के सुंदरीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विभिन्न तरह के कार्य कराने के लिए मुख्यमंत्री संवर्धन योजना के तहत 19 करोड़ की धनराशि प्रदेश सरकार ने मंजूर की थी। इसके अलावा सरकार ने मंदिर के पास स्थित करीब 42 एकड़ के रकबे वाले तालाब के पानी को साफ सुथरा करने, इस पर घाट, सीढि़यां और पाथ-वे का निर्माण करने, रामताल के किनारे से ही मंदिर तक सीधा व चौड़ा रास्ता बनाने सहित विभिन्न अन्य तरह के कार्यों के लिए अमृत सरोवर योजना के तहत 11 करोड़ की धनराशि अलग से मंजूर की थी। इस धनराशि से दोनों जगहों पर कार्य चल रहे हैं।