रामगंगा नदी का जलस्तर शनिवार को जिस गति से बढ़ा था रविवार की रात से उसी गति से घट रहा है। नदी के उतार पर होने के बाद भी भू-कटाव अभी न के बराबर है। भू-कटाव से राहत तथा रविवार की रात सेे हो रही बारिश से तटवर्ती गांवों के बाशिदों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं।
शनिवार को बिना किसी पूर्व सूचना के रामगंगा के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि र्हुई थी। इससे गांव बड़े पहरूआ में भू-कटान की गति काफी बढ़ गई थी। रामगंगा के किनारे पर आ गए गांव छोटा पहरूआ, बड़ा पहरूआ, हरिहरपुर, मौजमपुर, कुनियां शाहनजीरपुर आदि के ग्रामीण अपनी घर-गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर खुद अपने आशियाने तोड़ने में लग गए थे। शनिवार की रात में जिस गति से बढ़ा जलस्तर उसी गति से रविवार की रात से घटने लगा है। जलस्तर घटने के बाद भी यहां भू-कटाव न के बराबर है। बाढ़ से फौरी राहत मिलने के बाद भी ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। बेघर हो चुके बाढ़ पीड़ित खुले आसमान के नीचे पड़े हुए थे। जो रविवार की रात से हो रही लगातार बारिश से बेहद परेशान हैं। किसी तरह पन्नी आदि की व्यवस्था कर बारिश से अपना सिर ढक चुके बाढ़ पीड़ितों के सामने अब पेट भरने की समस्या आडे़ आ रही है। नीचे बाढ़ और ऊपर से बारिश के होने से पीड़ितों का कलेजा मुंह को आ रहा है।
रामगंगा के तटवर्ती गांवों के वे लोग भी कम परेशान नहीं हैं, जिनके मकान तो अभी बचे हुए हैं, किंतु उनकी कृषि योग्य भूमि रामगंगा निगलती जा रही है। हालांकि रामगंगा के तटवर्ती गांवों के युवा पिछले वर्षों से ही पेट पालने के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात आदि प्रांताें में मजदूरी करने के लिए पलायन कर गये हैं। गांव में बुजुर्ग और महिलाएं-बच्चे गांवों मे बेटों की कमाई पर घर चला रहे हैं।