पहाड़ी और मैदानी इलाके में हुई भारी बारिश से रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से मंगलवार को पहरुआ गांव में स्थित प्राथमिक स्कूल के कमरे का हिस्सा नदी में समा गया। अब स्कूल में सिर्फ एक कमरा ही बचा है।
सोमवार की रात से गंगा एवं रामगंगा का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। गंगा का बहाव क्षेत्र अधिक होने के कारण जलस्तर में हुई वृद्धि का कोई असर नहीं है। जबकि रामगंगा के जलस्त्तर में वृद्धि होते ही नदी के किनारे की बलुआ मिट्टी नदी में बहकर जाते ही भू-कटान का खतरा बढ़ गया है। मंगलवार को बारिश और रामगंगा के जलस्तर में वृद्धि से पहरुआ गांव के प्राथमिक स्कूल के कमरे का आधा हिस्सा नदी में समा गया है। स्कूल के शिक्षकों ने छात्रों को एकल कक्ष में बैठाकर शिक्षण कार्य किया। उधर, मौजमपुर, हरिहरपुर और कुनिया में बाढ़ और बारिश से तटवर्ती भूमि का कटान शुरू हो गया है।
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बाढ़ व बारिश से बचाव कार्यो में आ रही बाधा
डीएम नरेंद्र कुमार सिंह के प्रयास से प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेशचंद्र द्वारा आवंटित एक करोड़ की धनराशि से सिंचाई विभाग रामगंगा के पुराने बहाव मार्ग की सिल्ट सफाई कराने के बाद नदी के रुख को मोड़ने के लिए ग्राम पहाड़पुर के निकट पाली बैग में रेता-मिट्टी भरकर ठोकर बना रहा है। सोमवार को बीस मीटर लंबे, तीन मीटर चौड़े और लगभग दो मीटर ऊंचे दो पाली बैग में रेत और मिट्टी भरकर नदी के मुहाने पर लगाए गए थे। फिलहाल सिंचाई विभाग के इस प्रयास से नदी का आबादी की ओर बढ़ा रुख बदल नहीं रहा है और न ही नदी के पुराने बहाव मार्ग की सिल्ट सफाई के बाद बदल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार भारी बारिश से नदी के जलस्तर में वृद्धि और भू-कटाव से सिंचाई विभाग के प्रयासों पर फिलहाल पानी फिरता नजर आ रहा है।
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पहरुआ गांव नदी व तालाब से घिरा
रामगंगा के तटवर्ती गांव पहरुआ में कई दिन से हो रही बारिश से एक तरफ रामगंगा का कहर तो दूसरी ओर बारिश से ओवरफ्लो हुए तालाब के गंदे पानी से गांव का प्रवेश मार्ग बंद हो गया है। ग्रामीणों को रोड पर भरे दो फिट गहरे गंदे पानी से होकर आना जाना पड़ रहा है। तालाब के आसपास बने कई मकानों में भी गंदा पानी भर गया है।