जलालाबाद (शाहजहांपुर)। रामगंगा नदी का जलस्तर करीब 15 सेंटीमीटर घट गया है। इसके बावजूद रविवार को नदी खतरे के निशान से 65 सेंटीमीटर ऊपर रही। पानी कम होने से प्रभावित गांवों में लोगों को राहत जरूर पहुंची है, लेकिन रोजमर्रा के काम निपटाने से जुड़ी दुश्वारियां अभी कम नही हुईं हैं।
जलस्तर बढ़ने से बीते चार दिनों से बस्तियों से लेकर खेत खलिहानों व आने-जाने के रास्तों पर भरा पानी अभी पूरी तरह कम नही हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि बाढ़ से पूरी तरह निजात मिलने में करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है। इस क्षेत्र के कसारी, रैपूरा, बलदेबपुर, तेरा, उइला, थाथरमई, शेरपुर, हथिनापुर व मिर्जापुर क्षेत्र के गढ़ी औरंगाबाद, सिठौली, बीघापुर, उदयपुर भूड़ा, मौजमपुर व पहरुआ सहित अल्हागंज क्षेत्र के कई गांवों की बस्तियों में अब भी पानी भरा हुआ है और लोग रोजमर्रा की जरूरत पूरी कर पाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।
नदियों का जलस्तर घटने से तिकोला घाट, कसारी, बलदेवपुर, शाहपुर, एलमनगर व काजरबोझी गांवों को जाने वाले रास्तों पर पानी के बहाव का क्षेत्रफल भले कम हो गया हो, लेकिन रास्ते अवरुद्ध हैं।
तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि अभी और पानी छोड़े जाने की सूचना नहीं होने से अब पानी लगातार कम होने की उम्मीद है। प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के प्रयास लगातार चल रहे हैं। बताया कि रविवार को भी कसारी में 1200, संगाहा, उइला व थाथरमई में 2060 तथा अन्य गांवों को मिलाकर चार हजार से ज्यादा खाने के पैकेटों का वितरण कराया गया।
मिर्जापुर के गढ़ी औरंगाबाद गांव में पानी से घिरी झोंपड़ी। स्रोत : जागरूक पाठक