परौर। गत वर्षों में रामगंगा में आई बाढ़ से कटान वाले जिन हिस्सों पर अस्थायी ठोकरें बनाई गई थीं, उनकी मरम्मत का काम जल्द शुरू होगा। सिंचाई विभाग के अवर अभियंताओं की टीम ने शुक्रवार को यहां आकर तटीय क्षेत्रों में भ्रमण कर भूमि कटान की चपेट में आ चुके वह हिस्से देखे, जहां बनाई गईं ठोकरें अथवा जिओ ट्यूब क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
हर साल मानसून सीजन में नदियां उफनाने पर रामगंगा के कई तटीय गांव टापू बन जाते हैं। वर्ष 2000 में आई बाढ़ में हुए भूमि कटान से नारायणनगर पूर्वी और मंझा गांव का सफाया हो गया था और वहां के विस्थापित बेघर परिवार अभी तक खानाबदोश जीवन बिताने के लिए मजबूर हैं। दो साल पहले रामगंगा के किनारे मोहनपुर, नारायणनगर पश्चिमी, बिचपुरी, दहेलिया आदि गांवों में भूमि कटान रोकने के लिए बालू से भरे कई जिओ ट्यूब और बंबू क्रैट की अस्थायी ठोकरें पानी के तेज बहाव में बह गई थीं।
इस कारण इन सभी गांवों पर बाढ़ से घिरने का खतरा फिर से मंडराने लगा है। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता के निर्देश पर विभाग के अवर अभियंता मोहित कुमार सिंह, सुबोध कुमार सिंह और बृजेश कुमार सिंह परौर पहुंचे। उन्होंने कटान प्रभावित क्षेत्र का भ्रमण कर उन ग्रामीणों से भी बात की, जिनकी जमीनें और मकान कटान की भेंट चढ़ चुके हैं।
कटान रोकने के बारे में चर्चा होने पर नारायण नगर के हरिओम कुशवाहा, कृष्ण पाल, महेश सिंह आदि ने अपने गांव के पास जिओ ट्यूब की चार ठोकरों की जरूरत बताई। मोहनपुर के लोगाें ने कटान के पांच ठिकानों पर ठोकरें बनाए जाने की मांग की।
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विभाग के अवर अभियंताओं को यह आकलन करने के लिए भेजा गया है कि रामगंगा के किनारे किन स्थानों पर कटान रोकने की आवश्यकता है। अभियंताओं की रिपोर्ट के आधार पर बाढ़ से बचाव के लिए अनुरक्षण कार्य तय होंगे। जल्द ही क्षतिग्रस्त जिओ ट्यूब और बंबू क्रेट की मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा।
-सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग