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अहंकारी रावण को राम के हाथों मिली वीरगति

Wed, 12 Oct 2016 12:08 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
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रावण बना पात्र।
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खिरनीबाग रामलीला मैदान में चल रही रामलीला में मंगलवार को विजयदशमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। अहिरावण वध के बाद जब राम-लक्ष्मण का लंका नरेश रावण के साथ घमासान युद्ध हुआ तब दर्शक प्रभु राम और वीर हनुमान की जय-जयकार करने लगे। वहीं, मैदान में रावण की सेना और राम की सेना भी आपस में युद्ध को उतर आई। यह दृश्य देखकर दर्शक बहुत रोमांचित हुए। अंतत: रावण को मारने के लिए राम ने कई प्रयास किए, लेकिन रावण का अंत नहीं हो सका। 
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काफी देर युद्ध के बाद जब राम को सफलता नहीं मिली तो विभीषण ने प्रभु राम के कान में रावण की मौत का रहस्य बताया, जिस पर राम ने उसकी नाभि में वाण मारकर रावण को धराशायी कर दिया। रावण के जमीन पर गिरते ही राम ने भाई लक्ष्मण को उसके पास भेजा और उससे गुरुमंत्र लेने को कहा। इसके बाद रावण ने लक्ष्मण को उपदेश दिए। फिर राम ने रावण को अपने धाम भेज दिया। 
रावण की वीरगति के बाद विभीषण ने मेघनाद और रावण के पुतले को आग लगाई। देखते ही देखते एक-एक कर दोनों के पुतले धू-धू कर जल उठे और आतिशबाजी से दिशाएं गूंज उठीं। दर्शक रावण के पुतले की खपच्चियां लेने को दौड़ पड़े। फायर ब्रिगेड ने पुतलों की आग ठंडी की और दर्शकों पर काबू पाया। इधर, रावण का पुतला फुंकते ही दर्शकों में जोश आ गया और वह प्रभु राम, लक्ष्मण, हनुमान आदि की जय-जयकार करने लगे। सभी ने अपने से बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और विजयदशमी की वधाई दी। मंगलवार के कारण रावण का पुतला रात 12 बजे के बाद फूंका जा सका। इससे पूर्व मेला संयोजक भाजपा विधानमंडल के नेता सुरेश कुमार खन्ना ने मेला अध्यक्ष निर्भय चंद्र सेठ, वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेंद्र पाल यादव, सचिव नरेंद्र गुरू, मेला प्रबंधक नीरज वाजपेयी, कोषाध्यक्ष सुरेश सिंघल, विनोद अग्रवाल आदि के साथ रामलीला पात्रों और सहयोगियों को सम्मानित भी किया।
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मेघनाद की वीरगति के बाद सती हुई पत्नी सुलोचना
ओसीएफ रामलीला में मंगलवार को मेघनाद वध लीला का मंचन किया गया। नियमित आरती के बाद शुरू हुई लीला का जिला प्रशासन और ओसीएफ प्रशासन ने भी आनंद लिया। 
मंगलवार की लीला में दिखाया गया कि मेघनाद युद्ध के लिए लक्ष्मण को ललकारते हैं और उसके बाद दोनों में घमासान छिड़ जाता है। इस बार मेघनाद को मुंह की खानी पड़ती है और वह लक्ष्मण के हाथों वीरगति को प्राप्त होता है। मेघनाद की मृत्यु के बाद उसका एक हाथ पत्नी सुलोचना के कक्ष में गिरता है, सुलोचना पति का हाथ देखकर बहुत व्याकुल होती है और वह मेघनाद का सिर लेने के लिए रामादल में जाती है। 
राम से सुलोचना का संवाद होने के बाद पति का शीश मांग लाती है। उधर, पुत्र मेघनाद के वीरगति की सूचना पाकर रावण बहुत दुखी होता है। वह सुलोचना को बहुत समझाता है, इसके बाद दुखी सुलोचना पति मेघनाद के साथ सती हो जाती है। रामलीला में रावणदल और रामादल शामिल होने और आपस में युद्ध करने के लिए छोटे-छोटे बच्चों में भी बहुत क्रेेज बना हुआ है। इसमें कुछ बच्चे तो पांच-सात वर्ष आयु के भी हैं। उन्हें मंच पर फुदकने और जय-जयकार करने में बहुत मजा आ रहा है। 
झूला और फूड जोन में उमड़े दर्शक 
ओसीएफ मेला प्रदर्शनी में दर्शकों के मनोरंजन के लिए काफी व्यवस्था की गई है। मेला का चार जोन में बांटा गया है, ताकि सभी प्रकार के दर्शक अपनी रुचि के अनुसार मेले का आनंद ले सकें। एक जोर झूलों, सर्कस, जादू, मौत का कुआं आदि का है, जबकि दूसरा जोन फूड जोन है, जिसमें चाट-पकौड़ी से लेकर तरह-तरह के खानपान के स्टाल लगाए गए हैं। तीसरा जोन खेल-खिलौने, घरेलू आइटम और सौंदर्य सामग्री का है। तीसरा जोन रामलीला का है। मेला में जहां महिलाएं, युवा और बच्चे आकर्षक झूलों का लुत्फ ले रहे हैं, वहीं फूड जोन में लोग परिवार के साथ खानपान का आनंद ले रहे हैं। इसके बाद खरीददारी करते हुए वह घरों को लौट रहे हैं। एक वर्ग वह भी है जो रामलीला का मंचन देखने में भी रुचि ले रहा है। झूला जोन में सर्वाधिक भीड़ उमड़ रही है। इस क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने को सत्य प्रकाश शुक्ला, इमरान अली खां, कुंदन सिंह, मो. इकबाल, शफीक आदि मुस्तैदी से डटे रहते हैं, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो सके।
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